मंगलवार, 7 जनवरी 2014

आठ जून से ही होगी कैलास मानसरोवर यात्रा

आपदा से आई दिक्कतों के बावजूद यथावत है कार्यक्रम 
पांच मार्च तक इस लिंक को क्लिक कर के कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन 
10 मार्च तक जमा करने होंगे सभी प्रपत्र
नैनीताल (एसएनबी)। दो देशों की सीमाओं में होने वाली अनूठी धार्मिक यात्रा कैलास मानसरोवर यात्रा बीते वर्ष आई दिक्कतों के बावजूद इस वर्ष भी तय कार्यक्रम के अनुसार होने जा रही है। विदेश मंत्रालय ने यात्रा की तिथियों और पैटर्न में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि पिछले साल कई बदलाव किए गए थे। विदेश मंत्रालय ने यात्रा का कलेंडर व अन्य ब्यौरा वेबसाइट पर जारी कर दिए हैं। यात्रा आठ जून से नौ सितंबर होगी। आगामी पांच मार्च तक यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है और 10 मार्च तक आवेदन संबंधी आवश्यक प्रपत्र जमा करने होंगे। उल्लेखनीय है कि 2012 तक कैलाश मानसरोवर यात्रा 26 दिनों की होती थी, एक जून से प्रारंभ होकर सितंबर आखिर तक चलती थी और 16 दल ही यात्रा में जाते थे। पहली बार 2013 में इसकी अवधि चार दिन घटाकर 22 दिन कर दी गई थी। पिछले वर्ष यात्रा आठ जून से नौ सितंबर तक के लिए तय की गई थी। हालांकि प्रदेश में आई आपदा के बाद केवल एक ग्रुप के यात्री ही यात्रा पूरी कर पाए थे। विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार इस वर्ष की 22 दिनों की यात्रा आठ जून से नौ सितंबर तक होगी। यात्रा में 60-60 यात्रियों के 18 दल जाएंगे। शुल्क भी यथावत रखा गया है, यात्रा के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम को 32 हजार रपए और चीन सरकार को 901 डॉलर देने होंगे। केएमवीएन के एमडी दीपक रावत ने बताया कि यात्रा का कार्यक्रम कमोबेश पूरी तरह पिछले वर्ष का ही रखा गया है। वहीं निगम के मंडलीय प्रबंधक डीके शर्मा ने बताया कि यात्रा 12 जून को दिल्ली से चलकर अल्मोड़ा पहुंचेगी। यात्रा मार्ग में बदलाव नहीं किया गया है। पिछले वर्ष यात्रा पथ पर एक वर्ष पूर्व ही जुड़ा चौकोड़ी रात्रि पड़ाव हटा दिया गया था, वहीं चीन में बिताए जाने वाले तीन दिन भी कम कर दिए गए थे। पहले दल के यात्री अल्मोड़ा, धारचूला, सिरखा, गाला, बुदी, गुंजी (दो दिन-मेडिकल के लिए), नाभीढांग, तकलाकोट (दो दिन- चीन की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए), चीन में दारचेन, जुनजुई पू, कुगू (दो दिन), वापस तकलाकोट, गुंजी, बुदी, गाला, धारचूला व जागेश्वर में रात्रि पड़ावों के साथ तीन जुलाई को वापस दिल्ली लौट जाएंगे। 

शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

नैना पीक तक पहुंची बिजली

मैदानों में कोहरा, पहाड़ों पर खिली धूप: शुक्रवार से जहां तराई-भाबर के मैदानी क्षेत्रों में पूरे दिन घना कोहरा छाने से कड़ाके की ठंड रही, इसके उलट सरोवरनगरी सहित पहाड़ों पर आसमान में बादलों का एक कतरा भी नहीं था, और यहां पूरे दिन चटख धूप खिली रही।
चित्र : नवीन जोशी

नैना पीक तक जाने वाला तीन किमी मार्ग भी स्ट्रीट लाइट से जगमगाएगा
नैना पीक स्थित वन विभाग का रिपीटर सेंटर 
नैनीताल (एसएनबी)। रात में नैना पीक जाकर सरोवरनगरी की खूबसूरती को निहारने के शौकीन पर्यटकों के लिए खुशखबरी है। नैना पीक तक बिजली पहुंच गई है। इससे वहां वन विभाग के रिपीटर सेंटर के कक्ष में बिजली के बल्ब जलने लगे हैं। जल्द ही रिपीटर सेंटर के वायरलैस व अन्य उपकरणों को बिजली से जोड़ने की तैयारी चल रही है तथा भविष्य में बिजली से किलबनी रोड स्थित नैना चुंगी से नैना पीक जाने वाले करीब तीन किमी मार्ग को स्ट्रीट लाइट से जगमगाने की योजना भी है। इससे रात में भी सैलानी सुरक्षित तरीके से नैना पीक तक आवाजाही कर सकेंगे। नैना पीक सरोवरनगरी का सर्वाधिक ऊंचाई वाला 2611 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां से नैनीताल नगर के साथ ही तराई-भाबर के सैकड़ों किमी दूर के स्थानों और हिमालय पर्वत की 365 किमी से अधिक लंबाई में बदरीनाथ-केदारनाथ से लेकर नेपाल की एपी श्रृंखला की चोटियों के नजारे लिये जा सकते हैं। कई मौकों पर सैलानी व साहसिक पर्यटन के शौकीन रात्रि में बिजली की रोशनी से जगमगाते नैनीताल तथा दूर-दूर के पहाड़ों और मैदानों के नजारे लेने व फोटो खींचने के लिए यहां आते हैं। घना जंगल होने की वजह से यहां रात्रि में वन्य जीवों के हमले का खतरा रहता है। बिजली की रोशनी हो जाने से भविष्य में इस स्थान का आवागमन बेहद सुविधाजनक हो सकता है। इस स्थान पर वन विभाग का प्रदेश के गिने-चुने रिपीटर सेंटरों में से एक स्थित है, जिसकी मदद से पूरे कुमाऊं तथा आंशिक रूप से गढ़वाल में भी लीसे के इधर-उधर संचरण, वनाग्नि की घटनाओं आदि पर वायरलेस की मदद से नजर रखी जाती है। वन क्षेत्राधिकारी प्रकाश जोशी ने बताया कि इसी के लिए बिजली नैना पीक पर पहुंचाई गई है, जल्द ही कार्यदायी संस्था रिपीटर सेंटर के उपकरणों को विद्युत आपूर्ति से जोड़ने जा रही है। वहीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता शेखर त्रिपाठी ने बताया कि बिजली की लाइन नैना पीक जाने वाले पैदल मार्ग से ही होकर गुजारी गई है। शीघ्र ही इस पर स्ट्रीट लाइट लगाने की भी योजना है। 

सोमवार, 30 दिसंबर 2013

नैनीताल में क्या गुल खिलायेगी बचदा और बलराज की दोस्ती !

नैनीताल। एकता संदेश यात्रा के जरिए जहां एक ओर सरदार पटेल के माध्यम से भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के पक्ष में राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है, वहीं यात्रा में नैनीताल-ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से भाजपा के दो स्वघोषित दावेदार बची सिंह रावत ‘बचदा’ और बलराज पासी के एक साथ अगल-बगल खड़े होने के भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों एक- साथ खड़े होकर पार्टी पर टिकट के लिए दबाव बनाना चाहते हैं। साथ ही अन्य दावेदार पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को अलग-थलग करने और एक-दूसरे के नाम पर सहमत होने का सन्देश भी दे रहे थे। 

पटेल पीएम बनते तो न होता बंटवारा: बचदा

नैनीताल पहुंचकर हुआ एकता संदेश यात्रा का समापन
नैनीताल (एसएनबी)। भाजपा के वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत ‘बचदा’ ने कहा कि सरदार बल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से ही देश एकसूत्र में बांधा था, बावजूद इसके राजनीतिक कारणों से उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया। उनका कहना है कि पटेल को प्रधानमंत्री बनाया होता तो देश का बंटवारा न होता। रावत सोमवार को 20 दिसंबर से शुरू हुई एकता संदेश यात्रा के आखिरी पड़ाव नैनीताल पहुंचकर पार्टी कार्यकर्ताओं और आम जन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू हुई इस यात्रा के जरिए देश को एकसूत्र में पिरोने की कोशिश की जा रही है। पूर्व सांसद बलराज पासी ने सरदार पटेल का जीवन वृत्त प्रस्तुत किया। इससे पूर्व नगर में यात्रा के पहुंचने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने यात्रा का भव्य तरीके एवं गर्मजोशी से स्वागत किया। जिलाध्यक्ष देवेंद्र ढैला, नगर अध्यक्ष विवेक साह, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य खीमा शर्मा, संयोजक रेनू अधिकारी व कुंदन बिष्ट आदि यात्रा रथ पर ही सवार हो गए। पूर्व अध्यक्ष भुवन हरबोला, जगदीश बवाड़ी, सीपी धूसिया, आनंद बिष्ट, मीनू बुधलाकोटी व संतोष साह सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता भी स्वागत में शामिल हुए। 

रविवार, 29 दिसंबर 2013

800 पुलिसकर्मियों की भर्ती का मामला लटका

मिलेंगे 500 नये दारोगा, 250 पदोन्नति से व 250 नई भर्ती से आएंगे : डीजीपी 
नैनीताल (एसएनबी)। उत्तराखंड पुलिस में फिलहाल 800 नये आरक्षियों की भर्ती का मामला लटक गया है। डीजीपी बीएस सिद्धू का कहना है कि अब इन पुलिसकर्मियों की भर्ती नहीं होगी। हालांकि उन्होंने कहा कि पुलिस में 500 नये दारोगा बनाए जा रहे हैं। इनमें से 250 नये दारोगा प्रमोशन के बाद लिए जाएंगे तो 250 दारोगा नई भर्ती से तैनात किये जाएंगे। डीजीपी ने कहा है कि पुलिस महकमा अपने पुलिसकर्मियों को अन्य विभागों से कम वेतन मिलने का परीक्षण भी कराया जाएगा। विभाग मोबाइल हाईवे ट्रैफिक पेट्रोलिंग यूनिट की नई शुरुआत भी करने जा रहा है। डीजीपी संधू ने यह खुलासे रविवार को मुख्यालय में डीआईजी कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में किये। वह यहां उत्तराखंड न्यायिक अकादमी-उजाला भवाली में एसपी व एसएसपी स्तर के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला तय करने के इरादे से आये थे। उन्होंने कहा कि पुलिस की कमी से अदालतों में वादों के शिथिल पड़ जाने की परेशानी से कुछ हद तक निजात मिलेगी। उन्होंने पड़ोसी देश नेपाल में माओवाद की समस्या के मद्देनजर प्रदेश की सीमाओं पर विशेष चौकसी बरतने की बात भी कही, तथा खास तौर पर अपराधों के नियंतण्रके लिए प्रदेश के चार जिलों, दून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर व नैनीताल में पूर्व में गठित होमीसाइड स्क्वाड को फिर से सक्रिय करने का इरादा भी जताया। इस मौके पर डीआईजी जीएन गोस्वामी तथा एसएसपी डा. सदानंद दाते भी मौजूद थे। 

जल्द खुलेंगे 50 नये थाने व चौकियां

हल्द्वानी (एसएनबी)। डीजीपी बीएस सिद्धू ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही 50 नये थाने व चौकियां खोली जाएंगी। इसके साथ ही पुलिस महकमे की सभी गाड़ियों का बीमा किया जाएगा। पुलिस को और अधिक सक्षम बनाने के लिए उजाला एकेडमी प्रशिक्षण देगी। यह एकेडमी अब तक 325 एसआई व 15 उप पुलिस अधीक्षकों को प्रशिक्षण दे चुकी है। उन्होंने कहा कि साइबर क्राइम को रोकने के लिए पुलिस को विशेष प्रशिक्षण देने पर विचार किया जा रहा है। डीजीपी सिद्धू रविवार को पुलिस बहुउद्देश्यीय भवन में पत्रकारों से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि उजाला एकेडमी में 19 जनवरी से कुमाऊं के डीएम व एसएसपी की वर्कशाप तथा दो फरवरी से गढ़वाल के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जायेगा। एकेडमी में पुलिस को चार्जशीट, केस की पूरी स्टडी करने का प्रशिक्षण दिया जायेगा, ताकि अपराधी किसी भी कीमत पर सजा से बच न सकें। उन्होंने कहा कि र्मडर की जांच के लिए होमी साइट्स जांच कमेटी बनायी गई है। इसमें प्रशिक्षित पुलिस अधिकारियों के साथ ही जांच की पूरी किट को रखा गया है। डीजीपी ने कहा कि हल्द्वानी में निर्माणाधीन फायर स्टेशन भवन के लिए सरकार से 50 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। इसके अलावा राज्य में जल्दी ही 50 नये थाने व चौकियों खोली जाएंगी।उन्होंने पुलिसकर्मियों के ग्रेड पे के मामले में मुख्यमंत्री के पास प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के भत्तों में बढोतरी की गई है। पुलिस की गाड़ियों का बीमा न किये जाने के सवाल के उत्तर में उन्होंने कहा कि अगर पुलिस महकमे की गाड़ियों का बीमा नहीं है तो वे जल्द पता कर महकमें की सभी गाड़ियों का बीमा करवाएंगे। उन्होंने कहा कि एमवी एक्ट के तहत प्रत्येक वाहन का र्थड पार्टी बीमा होना जरूरी है। इससे पूर्व डीजीपी को पुलिस ने गार्ड आफ आनर दिया गया। इस मौके पर उप महानिरीक्षक जीएन गोस्वामी व अन्य अफसर थे। 

‘थर्टी फर्स्ट’ के जश्न से आपदा के 'घाव' धुलने की उम्मीद !

पर्यटन कारोबारियों के खिले चेहरे

नैनीताल (एसएनबी)। सरोवरनगरी में ‘थर्टी फस्र्ट’ से पहले एक बार फिर सीजन जैसा माहौल बनना शुरू हो गया है। ‘थर्टी फस्र्ट’ के जश्न मनाने के लिए सैलानियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप सीजन के बाद पहली बार नगर के होटलों में कमरे पैक होने शुरू हो गये हैं। रविवार को नगर में थर्टी फस्र्ट मनाने के लिए बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचे रहे हैं। माल रोड सहित हर ओर सैलानियों का रेला नजर आ रहा है। नैनी झील में भी नौकाओं का पूरे दिन मेला लगा रहा। फ्लैट्स की कार पार्किग दोपहर में ही भर गई, और वाहनों को खेल मैदान में खड़ा करवाना पड़ा। इससे नगर के पर्यटन कारोबारियों के चेहरे खिले नजर आ रहे हैं। वहीं दो दिन पूर्व ही नगर की फ्लैट्स मैदान स्थित कार पार्किग पैक हो गई है और वाहनों को खेल मैदान में खड़ा करना पड़ रहा है। उम्मीद की जा रही है कि नववर्ष के स्वागत में 31 दिसम्बर को होने वाला जश्न नगर के पर्यटन कारोबारियों के आपदा से मिले जख्मों को धोकर पर्यटन को पूरी तरह पटरी पर लौटाने में मदद दिलाएगा।

बर्फबारी होने की उम्मीद

नैनीताल। सरोवरनगरी में दो दिनों से चटख धूप खिल रही है। मौसम मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को नगर का अधिकतम 14.2 व न्यूनतम 5.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। विभाग के अनुसार सोमवार को आसमान खुला रहेगा और तापमान 13 व छह डिग्री के बीच रह सकता है, जबकि 31 दिसम्बर को आसमान में बादल छाने और बारिश व बर्फबारी की हल्की उम्मीद की जा सकती है। इस दिन तापमान के 12 व सात डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। अलबत्त नववर्ष का पहला दिन वापस धूप खिलने के साथ 13 व पांच डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच सुहावना होने की उम्मीद है।

केएमवीएन परोसेगा मुफ्त व्यंजन

नैनीताल। नववर्ष के स्वागत की शाम कुमाऊं मंडल विकास निगम का तल्लीताल स्थित पर्यटक आवास गृह अपने यहां आने वाले सैलानियों का स्वागत कुमाऊं के छोलिया लोक कलाकारों से करवाएगा। टीआरएच के प्रबंधक अशोक साह साथ ही सैलानियों को डिनर में नि:शुल्क कुमाऊं के गहत की दाल, आलू के गुटके, मेथी व गडेरी की सब्जी, भांग की चटनी व खीर आदि लजीज व्यंजन परोसेगा।

बुधवार, 25 दिसंबर 2013

आपदा के मानसिक व सामाजिक प्रभावों का होगा अध्ययन

देश की सर्वोच्च समाज वैज्ञानिक अनुसंधान परिषद एक करोड़ रुपये से शुरू कराएगी परियोजनाएं
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड में विगत जून में आई भीषण आपदा में जन-धन के नुकसान की अलग-अलग स्तरों से हो रही भरपाई से इतर आपदा से प्रभावित मानव मन एवं समाज पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा। देश का सामाजिक विज्ञान क्षेत्र में अध्ययन कराने वाली शीर्ष संस्था भारतीय सामाजिक अनुसंधान एवं शैक्षिक परिषद (आईसीएसएसआर) इस क्षेत्र में करीब एक करोड़ रपए की लागत की परियोजनाएं शुरू करने जा रहा है। इन परियोजनाओं के लिए आईसीएसएसआर ने प्रस्ताव आमंत्रित किए थे, जिनका मूल्यांकन हो चुका है। प्रदेश में आई आपदा के बाद अनेक प्रभावितों के मानसिक संतुलन खोने की खबरें समाने आई हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है प्रभावितों के पुनर्वास में केवल नष्ट हुई जमीनें देना, घर बना देना या सड़क-बिजली-पानी जैसी ढांचागत सुविधाएं बहाल कर देना ही पर्याप्त नहीं होता। प्रभावित लोगों को अन्यत्र बसाने में उनके अपनी मूल मिट्टी से जुड़े सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों- परिवेश पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है, लिहाजा अपने प्रियजनों और मूल गांवों को खो चुके प्रभावितों के मानसिक पुनर्वास की भी जरूरत महसूस की जाती है। आईसीएसएसआर के निदेशक व पिथौरागढ़ जनपद के मूल निवासी डा. जीएस सौन ने बताया कि आपदा से प्रभावितों पर मानसिक व सामाजिक स्तर पर पड़े प्रभाव तथा उन्हें अब तक मिली आपदा राहत व मदद के प्रभावों का अध्ययन जैसे विषयों का न केवल एक बार वरन एक, दो एवं तीन वर्षो के अंतराल पर अध्ययन कराने के प्रस्ताव मांगे गए हैं। इन प्रस्तावों पर कुमाऊं व गढ़वाल विवि के साथ ही महाविद्यालयों एवं शोध संस्थानों के माध्यम से 15-20 लाख रपए की चार-पांच बड़ी परियोजनाएं कुछ दिनों के भीतर ही स्वीकृत होने की उम्मीद है। इससे प्रभावितों पर आपदा से पड़े सामाजिक प्रभावों का वैज्ञानिक तरीके से विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

सोमवार, 23 दिसंबर 2013

आजादी के वर्ष का एहसास कराएगा नये साल का कैलेंडर


हूबहू 1947 से मिलता है 2014 का कैलेंडर

नवीन जोशी, नैनीताल। समय चक्र ने हमें एक बार फिर से अतीत के उस दौर में पहुंचा दिया, जब पूरे देश को बस इंतजार था 15 अगस्त का। सब कुछ वही है, तारीख-दिन में कोई अंतर ही नहीं। जी हां, गौर से देखिएगा। नये साल में जो कैलेंडर हमारे सामने आ रहा है वह हूबहू वही है जो आजादी दिलाने वाले वर्ष 1947 में था। आपके पास वर्ष 1947 का वह ऐतिहासिक कलेंडर मौजूद है तो आपको अगले वर्ष के लिए नया कलेंडर लेने की जरूरत नहीं है, और यदि उस ऐतिहासिक वर्ष के तारीखों में दिन खोजने हैं तो 2014 के कैलेंडर में सब कुछ मिल जाएगा। हालांकि यह सामान्य सी बात है, और अनिश्चित अंतराल पर अनेक वर्षो के कैलेंडर समान होते रहते हैं। लेकिन जब बात 1947 के कैलेंडर की हो तो अनेक जिज्ञासा बढ़ना स्वाभाविक है। पुराने लोग इस कलेंडर को आज भी सुरक्षित रखे हुए हैं। खासकर उन्हें बृहस्पतिवार 14 अगस्त की मध्यरात्रि व 15 अगस्त के शुक्रवार का दिन कभी नहीं भूलता, जब देश पहली बार आजादी की सांसें ले रहा था। अनेक लोगों को याद है कि 1947 का वर्ष एक जनवरी को बुधवार से शुरू हुआ था और लीप वर्ष न होने की वजह से फरवरी में 28 दिन थे और वर्ष का समापन 31 जनवरी को बृहस्पतिवार को हुआ था। यह इत्तेफाक है कि आज भी देश बदलावों के दौर से गुजर रहा है, और 2014 में लोस चुनाव भी होने हैं, और कैलेंडर 1947 से पूरी तरह मिलता है।
2014 में लगातार चार-पांच दिन की छुट्टियां भी मिलेंगी

नैनीताल। छुट्टियों के मामले में नया साल 2014 सरकारी कर्मचारियों के लिए गुजरते साल से कुछ बेहतर रहेगा। उन्हें न केवल इस साल से ज्यादा छुट्टियां मिलेंगी बल्कि नए वर्ष में कई बार लगातार चार-पांच दिन के अवकाश के मौके भी मिलेंगे। हालांकि अभी राज्य सरकार ने अगले वर्ष के लिए छुट्टियों का कलेंडर जारी नहीं किया है, फिर भी अन्य प्रचलित कलेंडरों के आधार पर कहा जा सकता है कि इस वर्ष 52 रविवार, माह के दूसरे शनिवार के 12 व विभिन्न तीज त्योहारों के 22 व तीन निर्बधित छुट्टियों को मिलाकर कुल 89 अवकाश पड़ने की संभावना है। हालांकि पांच सार्वजनिक अवकाश शनिवार व रविवार को तथा नौ छुट्टियां अवकाश वाले दिनों में पड़ रही हैं। इस वर्ष दो अक्टूबर गांधी जयंती से तीन को विजयदशमी, चार व पांच अक्टूबर शनिवार- रविवार छह अक्टूबर को बकरीद का अवकाश रहने से लगातार पांच दिन की छुट्टियां लेने का मजा भी लिया जा सकेगा। इसी तरह 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के बाद 16-17 को शनिवार-रविवार तथा 18 अगस्त को जन्माष्टमी के अवकाश के साथ लगातार चार दिन की छुट्टी भी मिलेगी। ऐसे ही गुरुवार 23 से दीपावली के अवकाश के बाद गोवर्धन पूजा और फिर शनिवार- रविवार का अवकाश भी मिल जाएगा।
इन वर्षो के कैलेंडर भी 1947 जैसे
नैनीताल। एक जैसे कलेंडर वाले वर्षो के बारे में और अधिक अध्ययन करें तो पता लगता है कि ऐसा अनिश्चित अंतराल पर होता है। वर्ष का लीप इयर यानी फरवरी का 28 या 29 दिन के होने की वजह से यह अनिश्चितता रहती है। 1947 जैसे ही समान कलेंडरों की बात की जाए तो बीती शताब्दी में आजादी के बाद 1958, 1969, 1975, 1986 व 1997 में तथा वर्तमान 21वीं शताब्दी में वर्ष 2003 के कलेंडर भी समान रहे। वहीं आगे 2025, 2031, 2042, 2053, 2059, 2070, 2081और 2087 के कलेंडर भी 1947 जैसे ही रहने वाले हैं।


मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

कुमाऊं विवि की पहल: 'रूसा' के तहत कई केंद्र खोलने की योजना


कुमाऊं विवि में शोधों को बढ़ावा देने की होगी कोशिश : धामी
नैनीताल (एसएनबी)। कुमाऊं विवि शोध एवं अभिनव प्रयोगों को बढ़ाने की ओर कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में विवि की राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत कई केंद्र खोलने की योजना है। इनमें अमेरिका के रोजवैल पार्क न्यूयार्क के कैंसर इंस्टीटय़ूट बफैलो पार्क व सनी इंस्टीटय़ूट शामिल हैं। इनके सहयोग से स्थापित होने वाले केंद्रों के जरिये यहां आधुनिकतम फोटो डायनेमिक थेरेपी व सोनो डायनेमिक थेरेपी से कैंसर रोग के इलाज व उपचार पर शोध होंगे। इसके साथ ही बायो इंफारमेटिक सेंटर, नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर, समाज के निर्बल वगरे के लोगों को समाज की मुख्यधारा में लाने के केंद्र और पहाड़ की औषधियों की पहचान व उनकी बार-कोडिंग करने के केंद्र भी खोले जाएंगे। यह बात कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. होशियार सिंह धामी ने रूसा के तहत दो दिनों तक चली विभिन्न संकायों व विभागों के अध्यक्षों की बैठकों के बाद कही। उन्होंने बताया कि सभी विभागों व संकायों के अध्यक्षों से रूसा के प्रावधानों के तहत इन केंद्रों के लिए प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। बताया कि 19 दिसम्बर तक उन्हें प्रस्ताव देने को कहा गया है। इसके बाद कुमाऊं विवि 20 दिसम्बर को देहरादून में उच्च शिक्षा विभाग को यह प्रस्ताव सौंपेंगे। उन्होंने बताया कि इन केंद्रों के जरिए विवि में शोध व अध्ययन के स्तर को बढ़ाने एवं पहाड़ में उद्यमिता एवं कौशल को बढ़ाने का उद्देश्य भी रहेगा। बैठक में सहायक कुलसचिव डा. दिनेश चंद्रा, प्रो. मोहन दुर्गापाल, प्रो. संजय पंत, प्रो. बीआर कौशल, प्रो. एसपीएस मेहता, प्रो. एनडी कांडपाल, डा. आरपी पंत, प्रो. सत्यपाल बिष्ट, प्रो. नीरजा पांडे, प्रो. नीरज तिवारी, प्रो. मनोज पांडे, प्रो. बीना पांडे, प्रो. पारुल सक्सेना व प्रो. पीसी कविदयाल समेत सभी संकायों व विभागों के अध्यक्ष मौजूद रहे। 

मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

आज दो बार एक साथ आयेंगे 08:09:10 11:12:13

अंक विज्ञान के अनुसार खास है आज का दिन
नवीन जोशी नैनीताल। यदि आप न्यूमरोलॉजी यानी अंक विज्ञान और दिन की तारीखों में अंकों के खास समन्वयों की रोचकता को पसंद करते हैं तो बुधवार का दिन और दिसम्बर का महीना बहुत खास है। बुधवार को सुबह और शाम के समय दो बार ऐसी स्थिति बनेगी, जब समय व दिन बताने वाली डिजिटल घड़ियां और आपके कम्प्यूटर और लैपटॉप पर ‘08:09:10 11.12.13’ अंकित देखेंगे। यह होगा जब बुधवार को वर्ष 2013 के 12वें यानी दिसम्बर माह की 11वीं तिथि होगी और समय सुबह व शाम आठ बजकर नौ मिनट और 10 सेकेंड होंगे। ऐसी स्थिति 100 वर्षो में एक बार यानी कमोबेश हर किसी के जीवन में एक बार ही आएगी। पूर्व में यह स्थिति 1913 के 11 दिसंबर को आई होगी और आगे 2123 में आएगी। 

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‘मनी बैग’ देगा दिसम्बर !

इसके अलावा दिसम्बर में चीनी फेंग शुई मान्यताओं के अनुसार ‘मनी बैग’ की एक खास स्थिति भी बन रही है। इसके बारे में मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपनी डायरी और सोशल नेटवर्किंग साइट्स की प्रोफाइल पर इसे अंकित करते हैं, उन्हें चार दिन के भीतर धन की प्राप्ति होती है। हालांकि इस बात की सत्यता के कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं, बावजूद चीनी लोगों में इसकी होड़ रहती है। इस वर्ष दिसम्बर माह में भी यह खास स्थिति पांच रविवार, पांच सोमवार व पांच मंगलवारों के होने से आई है। इसके बारे में कहा जाता है कि ऐसा 823 वर्षो में एक बार होता है। यानी ऐसा दिसम्बर माह जिसमें पांच रवि, सोम व मंगलवार आएंगे, वह 823 वर्ष पूर्व वर्ष 1190 में और आगे वर्ष 2836 में आएगा। गौरतलब है कि 31 दिन के सभी महीनों में तीन वारों के पांच सप्ताह होते हैं। इस वर्ष जनवरी में पांच मंगल, बुध व बृहस्पति, मार्च में पांच शुक्र, शनि व रविवार, मई में पांच बुध, गुरु व शुक्र, जुलाई में पांच सोम, मंगल व बुध, अगस्त में पांच गुरु, शुक्र व शनि और अक्टूबर में पांच मंगल, बुध व गुरुवार आए, मगर किसी एक माह विशेष में समान वारों के पांच सप्ताह होने की स्थिति हमेशा 823 वर्षो में ही आती है। 

सोमवार, 9 दिसंबर 2013

सवा पांच करोड़ साल का हुआ अपना 'हिमालय'

कुमाऊं विवि के भूविज्ञान विभाग ने अंतरराष्ट्रीय शोध के बाद निकाला निष्कर्ष 
रेडियो एक्टिव डेटिंग से पहुंचे परिणाम तक  
नवीन जोशी नैनीताल। हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में लगातार शोध हो रहे हैं। वैज्ञानिकों में हिमालय की शुरुआत को लेकर अलग-अलग मत हैं। कोई इसे दो करोड़, तो कोई तीन करोड़ और कोई साढ़े पांच करोड़ वर्ष पुराना साबित कर रहा है। शोध के इन दावों के बीच कुमाऊं विवि के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने भी एक और शोध करने का दावा किया है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि लगभग छह वर्ष तक शोध करने के बाद यह पता लगा है कि हिमालय के बनने की शुरुआत सवा पांच करोड़ वर्ष पहले हुई थी। 
कुमाऊं विवि के भूविज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक उपकरणों के साथ किए एक अंतरराष्ट्रीय शोध के बाद दावा किया है कि हिमालय के जन्म की मुख्य वजह भारतीय उपमहाद्वीपीय प्लेट के यूरेशियन (तिब्बती प्लेट) में टकराने की शुरुआत 52.2 मिलियन यानी 5.22 करोड़ वर्ष पूर्व हुई थी और इसके बाद टकराने की यह प्रक्रिया लम्बे समय तक जारी रही। वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि अब भी भारतीय प्लेट का 35 मिमी प्रति वर्ष की दर से उत्तर की ओर खिसकते हुए यूरेशियन प्लेट में धंस रही है और यही इस क्षेत्र में बड़े भूकंपों की आशंका को बढ़ाने वाला है। कुमाऊं विवि के भूविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार ने सोमवार को ‘राष्ट्रीय सहारा’ से इस नये शोध के परिणामों का खुलासा करते हुए यह दावा किया। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विवि का शोध पूर्व में भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत की ओर पाए जाने वाले समान प्रकार के जानवरों के परीक्षण के आधार पर किए गए शोधों के आधार पर किए गए शोधों के करीब है, जिसमें हिमालय की उम्र 55 मिलियन वर्ष बतायी जाती है। उन्होंने बताया कि कुमाऊं विवि द्वारा यह परिणाम लद्दाख में पाई जाने वाली ग्रेनाइट की चट्टानों में मिले एक खास अवयव जिरकॉन की चीन व कोरिया में अत्याधुनिक ‘सेन्सिटिव हाई रेजोल्यूसन आयन माइक्रो प्रोब’ (श्रिम्प) तकनीक से आयु का पता लगाकर निकाला गया है। इसे रेडियोएक्टिव डेटिंग भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय शोध जर्नल में इसका प्रकाशन भी हो रहा है। इस शोध के आधार पर प्रो. कुमार कहते हैं कि सर्वप्रथम हिमालय के स्थान पर उस दौर में मौजूद टेथिस महासागर की सामुद्रिक प्लेटें आपस में टकराने से पिघलीं और इसके लावे से लद्दाख के पठारों का और बाद में भारतीय व यूरेशियन प्लेट के अनेक स्थानों पर लंबे समय अंतराल में अलग-अलग टकराने की वजह से वर्तमान हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ। इस शोध परियोजना में प्रो. कुमार के साथ ही विवि के डा. बृजेश सिंह, डा. मंजरी पाठक व डा. सीता बोरा आदि प्राध्यापकों व शोध छात्र-छात्राओं का भी योगदान है। 

सोना, तांबा के भंडार खोजने में मिलेगी मदद 
नैनीताल। कुमाऊं विवि द्वारा किया गया शोध हिमालय की वास्तविक उम्र जानने में तो मदद करता ही है, साथ ही इसके दूरगामी लाभ इस संदर्भ में भी हैं कि इसके जरिए हिमालय के भूगर्भ में पाई जाने वाली बहुमूल्य खनिज संपदा के बारे में भी पता लगाया जा सकता है। प्रो. कुमार कहते हैं कि इस तकनीक की मदद लेते हुए तांबा, सोना व मालिब्डेनम जैसे खनिजों की उपस्थिति वाले क्षेत्रों में इन तत्वों की खोज की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।