मंगलवार, 6 मार्च 2012

उत्तराखंड विधान सभा चुनाव परिणाम






उत्तराखंड में हुए विधान सभा चुनावों के चुनाव परिणाम कई बातें साफ़ करने वाले हैं. पहली नजर में इन चुनावों में प्रदेश में न तो भ्रष्टाचार का मुद्दा चला है, और न ही अन्ना फैक्टर. असल में यह चुनाव कुछ अपवादों को छोड़कर नेताओं को अपनी असल हैसियत बताने वाले साबित हुए हैं. 


चुनावों में जनरल काफी हद तक अपनी पारी को जंग जिता गए पर खंडूड़ी खुद की बाजी हार गए.  'खंडूड़ी है जरूरी' का नारा जितना प्रदेश और खासकर मैदानी जिलों में चला, उतना उनकी सीट कोटद्वार में नहीं चल पाया, ऐसे में यहाँ तक कहा जाने लगा कि शायद खंडूड़ी के पहले कार्यकाल में बजी 'सारंगी' को पूरा प्रदेश न सुन पाया हो पर कोटद्वार ने सुन लिया हो. उनकी हार से यहाँ तक कहा जाने लगा है-'खंडूड़ी नहीं रहे जरूरी', वहीँ निशंक पर लगे कुम्भ घोटाले के 'दागों' पर डोईवाला की जनता ने मनो 'दाग अच्छे हैं' कह दिया है.


यहाँ कुमाऊँ में केवल सात विधानसभा क्षेत्रों, सोमेश्वर से अजय टम्टा, डीडीहाट से भाजपा के बिशन सिंह चुफाल, काशीपुर से भाजपा के हरभजन सिंह चीमा, जसपुर से कांग्रेस के शैलेंद्र मोहन सिंघल, अल्मोड़ा से मनोज तिवारी, बागेश्वर से चंदनराम दास एवं जागेश्वर से कांग्रेस के गोविंद सिंह कुंजवाल फिर जीत का शेहरा बंधा पाए। यहाँ 15 सीटों पर भाजपा कब्जा करने में सफल रही, जबकि कांग्रेस ने दस सीटों का आंकड़ा तेरह पर पहुंचाया है, लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि वह भी अपनी पांच सीटों को बचा नहीं सकी। पहाड़ पर कांग्रेस औरमैदान में भाजपा मजबूत हुई. 


राज्य के दूसरे चुनावों में भाजपा व कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही हैं और त्रिशंकु विधानसभा उभर कर आई है। सत्तारूढ़ दल भाजपा को 31 और कांग्रेस को 32 सीटें मिली हैं। वर्तमान विधानसभा में तीसरी ताकत के रूप में मौजूद बहुजन समाज पार्टी व क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल को मतदाताओं ने नकार दिया है। बसपा को पांच सीटें गंवानी पड़ीं, जबकि यूकेडी के हाथ से दो सीटें छिटक गई। विधानसभा चुनाव 2007 में बसपा को आठ व उक्रांद को तीन सीटें मिली थीं, जबकि इस बार उक्रार्द का एक धड़ा-डी अस्तित्व विहीन हो गया है, जबकि दूसरे-पी ने केवल एक सीट जीतकर पार्टी का नामोनिशान मिटने से बचाया है. 700  से अधिक निर्दलीयों में से केवल यह जीते हैं. बेशक यह कांग्रेस के बागी हैं, लेकिन उन्हें चुनाव में टिकट न देने वाली पार्टी के लिए उन्हें सत्ता हथियाने के लिए अपनाना 'थूक कर चाटने' जैसा होगा. 


भाजपा सरकार के मुख्यमंती सहित पांच मंत्री मातबर सिंह कंडारी, त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रकाश पंत, दिवाकर भट्ट, बलवंत सिंह भौंर्याल  चुनावी रन में खेत रहे हैं हो  कांग्रेस  के तिलकराज बेहड़,  पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, किशोर उपाध्याय, जोत सिंह गुनसोला, काजी निजामुद्दीन जैसे पांच दिग्गजों ने शिकस्त खाई है. वहीँ बसपा के मोहम्मद शहजाद व नारायण पाल, उक्रांद-पी के काशी सिंह ऐड़ी व पुष्पेश त्रिपाठी, रक्षा मोर्चा के टीपीएस रावत, केदार सिंह फोनिया, उत्तराखंड जनवादी पार्टी के मुन्ना सिंह चौहान और निर्दलीय यशपाल बेनाम को हार का सामना करना पड़ा है। उक्रांद के दूसरे धड़े 'डी' यानी डेमोक्रेटिक की 'पतंग' उड़ने से पहले ही कट गयी है. वहीँ 'पी' के कद्दावर नेता ऐड़ी मुख्य मुकाबले से बाहर तीसरे स्थान पर रह गए...


कांग्रेस के युवराज राहुल गाँधी अपने खास प्रकाश जोशी को कालाढूंगी से नहीं जिता पाए तो विकास  पुरुष कहे जाने वाले 'एनडी' अपनी 'निरंतर विकास समिति' को कांग्रेस के हाथो बेचकर खरीदी गयी तीन में से दो सीटें नहीं जीत पाए. उनके भतीजे मनीषी तिवारी गदरपुर में चौथे स्थान पर रहे तो दून से हैदराबाद तक उनके हाथों मनपसंद 'विकास' करने वाले पूर्व ओएसडी आर्येन्द्र शर्मा को भी मुंह की खानी पडी.  अपने निजी हितों के आगे एनडी कितने 'बौने' हो सकते थे, यह इस चुनाव ने प्रदर्शित किया. चर्चा तो यह भी थी कि कांग्रेस कि सत्ता आने पर 'दो-ढाई वर्ष सीएम' बनाने की घोषणा कर चुके एनडी मनीषी से इस्तीफ़ा दिलाकर खुद चुनाव लड़ने की भी सोच रहे थे. 


कांग्रेस के बडबोले (छोटे से प्रदेश में डिप्टी सीएम का राग अलापने वाले) व हैट्रिक का सपना देख रहे बेहड़ की हार की पटकथा तो खैर अहिंसा दिवस के दिन रुद्रपुर में फ़ैली हिंसा के दौरान ही लिख दी गयी थी. बसपा के बड़ा ख्वाब देख रहे नारायण पाल का अपने भाई मोहन पाल के साथ विधान सभा पहुँचाने का ख्वाब भी जनता ने तोड़ दिया. 


स्त्रीलिंगी गृह 'शुक्र' के राज वाले नए विक्रमी संवत ( शुक्र ही नए वर्ष के राजा और मंत्री हैं, लिहाजा महिलाओं को राजनीतिक सत्ता दिला सकते हैं) में अकेले नैनीताल जनपद से कांग्रेस की 'तीन देवियाँ' इंदिरा हृदयेश, अमृता रावत व सरिता आर्य विजय रही हैं, उनके साथ ही शैला रानी रावत कांग्रेस से तथा भाजपा से पूर्व मंत्री विजय लक्ष्मी बडथ्वाल भी जीती हैं, और पहली बार राज्य में महिला विधायको की संख्या पांच पहुंची है. इंदिरा ने तो 42,627 वोट प्राप्त कर रिकार्ड 23,583 मतों के अंतर से जीत दर्ज की है. आगे इनमें से कोई महिला सत्ता शीर्ष पर पहुँच जाए तो आश्चर्य न कीजियेगा.... 

moolatah yahan bhee dekh sakate hain: http://newideass.blogspot.in/

मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

सच लिखे, कहानियां न बनाये पुलिस : डीजीपी


कहा, पुलिस सिर्फ व्यवस्था का हिस्सा, सजा दिलाना उसका काम नहीं 
कालाढूंगी प्रकरण में सरकार द्वारा मुकदमे वापस लेने पर कोई अफसोस नहीं : पांडे 
नैनीताल (एसएनबी)। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडे ने कहा कि पुलिस केवल न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा है। उसका काम मामले को अंजाम तक पहुंचाकर किसी को सजा दिलाना नहीं है, वरन न्यायिक व्यवस्था में उसकी भूमिका गेटकीपर की है जिसका कार्य केवल यह देखना है कि कोई मामला न्यायालय तक जाना है या नहीं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को ताकीद की है कि वह मामले को मजबूत बनाने के फेर में कहानियां न बनाए, वरन जो सच्चाई हो उसे लिखें। डीजीपी मंगलवार को मुख्यालय स्थित पुलिस लाइन में पत्रकारों से वार्ता के दौरान कालाढूंगी कांड में सरकार द्वारा मुकदमे वापस लिये जाने के सवाल पर प्रतिक्रिया कर रहे थे। उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा होने के नाते वह मानते हैं कि कई बार दोषी को सजा देना मानवीय एवं कई दृष्टिकोणों से जरूरी नहीं होता। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी घटना की जैसी प्राथमिक सूचना मिले, ठीक वैसी ही जीडी व सीडी में दर्ज करनी चाहिए, न कि कहानी बनानी चाहिए। पुलिस को उन्होंने सभी मामलों को दर्ज करने को कहा, साथ ही जोड़ा कि किस मामले को एफआईआर माना जाए या नहीं, यह कोर्ट का विवेकाधिकार है। उन्होंने ताकीद की झूठी प्राथमिकी दर्ज होने की दशा में निदरेषों का उत्पीड़न न होने पाये। उन्होंने कहा कि हालिया दौर में उन्होंने अधीनस्थ अधिकारियों से अपराध अधिक क्यों हो रहे हैं, व तत्काल अपराधों का खुलासा करने के आदेश देने बंद कर दिये हैं। बस यह पूछा जा रहा है कि आपराधिक मामलों में क्या कदम उठाये जा रहे हैं। माना कि आंकड़ेबाजी के फेर में अपराध दर्ज करने से बचना नहीं चाहिए।
सीसीटीएनएस व डीएनए डाटा बैंक बनाएगी पुलिस 
नैनीताल। डीजीपी जेएस पांडे ने बताया कि आधुनिकीकरण की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही उत्तराखंड पुलिस कम्प्यूटर नेटवर्किग के सीसीटीएनएस सिस्टम को जल्द लागू करने और प्रदेश में अपराधियों के डीएनए का डाटा बैंक बनाने की दिशा में चल पड़ी है। सीसीटीएनएस सिस्टम का साफ्टवेयर केंद्र सरकार के स्तर पर तैयार हो रहा है, वहीं अपराधियों के डीएनए का डाटा बेस तैयार करना अभी प्रारंभिक चरण में है। ऐसा होने से अपराधों के खुलासे में खासी आसानी होगी। डीजीपी ने पुलिस को सबसे बड़ा मानव संसाधन आधारित विभाग बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी कोशिश पुलिस कर्मियों को बेहतर आवास, आवागमन व संचार सुविधा दिलाना है। विभाग में उपनिरीक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया चल रही है, वहीं इंटरमीडिएट पास कांस्टेबलों को ग्रेड-पे देने और उपनिरीक्षकों के पदों पर अधिकाधिक पदोन्नति के अवसर देने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्वक चुनाव निपटाने के बाद राज्य पुलिस मतगणना एवं इसके ठीक बाद आ रहे होली के त्योहार को शांतिपूर्वक निपटाने की तैयारियों में जुटी है। विभाग के पेट्रोल एवं टीए-डीए से संबंधित बिल काफी समय से लंबित हैं। नई सरकार से उम्मीद होगी कि जल्द इन बिलों का भुगतान हो सकेगा।
पुलिसकर्मी लेंगे विधिक जानकारियां
राज्य विधिक प्राधिकरण एवं पुलिस महकमे में बनी सहमति
नैनीताल (एसएनबी)। उत्तराखंड पुलिस के जवानों को अब विधिक जानकारियां भी दी जाएंगी, ताकि कानून-व्यवस्था बनाये रखने के दौरान वह आवश्यक जानकारियों से अपडेट रहें। इस मामले में राज्य पुलिस एवं उत्तराखंड राज्य विधिक प्राधिकरण के बीच सहमति बनी है। राज्य के करीब 26 हजार पुलिसकर्मियों को प्राधिकरण द्वारा आम जनता को विधिक ज्ञान देने के लिए तैयार की गई 34 लघु पुस्तिकाएं (पंफलेट) दी जाएंगी। राज्य के पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडे ने बताया कि उत्तराखंड राज्य विधिक प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई इन पुस्तिकाओं से वह बेहद प्रभावित हुए। मंगलवार को उन्होंने इस बारे में उत्तराखंड उच्च न्यायालय में प्राधिकरण के अध्यक्ष उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल तथा प्राधिकरण के सचिव प्रशांत जोशी से भेंट की जिसके साथ इन पुस्तिकाओं को औपचारिक रूप से राज्य पुलिस को सौंपा गया। डीजीपी ने कहा कि प्रदेश पुलिस के जवान डिक्शनरी की भांति इन पुस्तिकाओं को अपने पास रखेंगे और जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग कर सकेंगे।

मंगलवार, 14 फ़रवरी 2012

नैनीताल जू की 'राजकुमारी‘ बनी एरीज की 'महारानी'

नैनीताल (एसएनबी)। नैनीताल जू प्रशासन पिछले कई दिनों से बंगाल टाइगर जोड़े के गोद लेने की प्रकिया के लिए कोशिशों में जुटा था। राष्ट्रीय सहारा में मंगलवार को रॉयल बंगाल टाइगर के इस जोड़े द्वारा इतिहास रचे जाने की दहलीज पर होने संबंधी खबर प्रकाशित होने के बाद चिड़ियाघर प्रशासन की यह मुराद पूरी हो गयी है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान यानी एरीज इस दिशा में आगे आया है। साथ ही चिड़ियाघर प्रशासन ने मां बनने जा रही मादा टाइगर को ‘राजकुमारी’, का नाम दे दिया है। 
मंगलवार को नैनीताल जू में एरीज के निदेशक प्रो. रामसागर ने प्रभागीय वनाधिकारी पराग मधुकर धकाते की उपस्थिति में रॉयल बंगाल टाइगर के जोड़े में से मादा बंगाल टाइगर को एक वर्ष के लिए गोद लिया। जू प्रशासन ने बताया कि इस मादा बंगाल टाइगर को वर्ष 2008 में रामनगर से घायलावस्था में लाया गया था। यहां इसके उपचार के बाद इसका रखरखाव अच्छी तरह से किया जा रहा है। एरीज के निदेशक प्रो. रामसागर ने इसका अंगीकरण करने का फैसला लिया है। इसका कुल खर्चा दो लाख रुपया सालाना है, जिसे संस्थान की ओर से दिया जाएगा। उनका कहना था कि वह जानवरों से अगाध प्रेम करते हैं व उनके संरक्षण के लिए हमेशा आगे रहते हैं। 
जल्द आयेगी एक्स-रे मशीन 
नैनीताल। पिछले दिनों भुजियाघाट क्षेत्र में घायलावस्था में एक वाहन टक्कर से घायल होने के बाद नैनीताल जू में एक्स-रे की जरूरत महसूस की गयी थी। इसी के चलते जू प्रशासन ने एक मोबाइल वाहन लाने की पहल की है। साथ ही जल्द ही एक्स-रे मशीन को जल्द ही लाने की कोशिश की जा रही है।

नैनीताल जू में रूस से आएंगे लाल पांडा, साइबेरियाई बाघ

हिम तेंदुआ, मोनाल व कस्तूरी मृग जैसे दुर्लभ जीव भी लाए जाएंगे नैनीताल जू में 
साइबेरियाई बाघ के लिए नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास से किया जा रहा संपर्क
देहरादून(एसएनबी)। पंडित गोविंद बल्लभ पंत हाई एल्टीटय़ूड जूलॉजिकल पार्क में पर्यटक जल्द ही ठंडे पर्वतीय क्षेत्रों के कई दिलचस्प और दुर्लभ जानवरों के दर्शन कर सकेंगे। जू में जल्द ही तीन लाल पांडा लाए जाएंगे। यही नहीं चिड़ियाघर आने वाले पर्यटक अब जल्द ही वहां साइबेरियाई बाघ, हिम तेंदुओं, मोनाल और कस्तूरी मृगों को विचरण करते भी देख सकेंगे। तराई केंद्रीय वन प्रभाग हल्द्वानी के डीएफओ व नैनीताल जू के निदेशक डॉ. पराग मधुकर धकाते का कहना है कि इन लाल पांडा को सिक्किम के जूलॉजिकल पार्क से लाया जा रहा है। उनका कहना है कि चिड़ियाघर में जल्द ही मोनाल और कस्तूरी मृग लाने की भी योजना है। मोनाल उत्तराखंड का राज्य पक्षी और नेपाल का राष्ट्रीय पक्षी है। लाल पांडा भालू प्रजाति का संकटग्रस्त जंतु है और यह पूर्वी हिमालय और दक्षिण पश्चिम चीन के जंगलों में पाया जाता है। बिल्ली से कुछ बड़ा यह जानवर ला-भूरे फर वाला और लंबी झबरी पूंछवाला होता है। इसके आगे के पैर छोटे होते हैं और यह ज्यादातर बांस खाता है। दुनिया में अभी केवल 10 हजार लाल पांडा ही बचे हैं जिनमें से अधिकांश चीन के जंगलों में पाए जाते हैं। समुद्रतल से 2100 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस चिड़ियाघर का प्रशासन चिड़ियाघर में एक साइबेरियाई बाघ और हिम तेंदुए लाने की कोशिश भी कर रहा है। ये दोनो एक समय चिड़ियाघर का प्रमुख आकषर्ण होते थे लेकिन पिछले साल ज्यादा उम्र के वजह से दोनों की मृत्यु हो गई। करीब दो साल पहले मरी मादा तेंदुआ रानी की मौत के बाद वन विभाग पिछले वर्ष बॉम्बे वेटनरी कॉलेज के जाने माने टैक्सिटर्मिस्ड डॉ. संतोष गायकवाड़ से उसकी ट्रॉफी बनवा चुका है। डॉ. धकाते का कहना है कि साइबेरियाई बाघ लाने के लिए प्रशासन ने भारत सरकार व सेंट्रल जू अथारिटी के मार्फत नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास से संपर्क किया है। इसी के साथ चिड़ियाघर प्रशासन देश के अन्य चिड़ियाघरों से हिम तेंदुओं का जोड़ा लाने के लिए संपर्क कर रहा है।

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

केवल पांच-छह फीसद की दर से ही बढ़ रहा नैनीताल का पर्यटन

नवीन जोशी नैनीताल। जी हां, नैनीताल में भले सीजन में पर्यटकों की जितनी बड़ी संख्या, भीड़-भाड़ दिखाई देती हो, पर पर्यटन विभाग के आंकड़े गवाह हैं कि प्रकृति के स्वर्ग कहे जाने वाले व विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी में अपार संभावनाओं के बावजूद केवल पांच से छह फीसद की दर से ही पर्यटन बढ़ रहा है जबकि विभाग आठ से 10 फीसद की दर से पर्यटन बढ़ने की उम्मीद जताता रहा है। 
उत्तराखंड को पर्यटन प्रदेश के रूप में राज्य सरकार द्वारा खूब प्रचारित किया जाता है। नैनीताल, मसूरी व काब्रेट पार्क रामनगर जैसे अपार पर्यटन संभावनाओं वाले अनेक पर्यटन स्थलों वाले प्रदेश में ऐसी संभावनाएं भी मौजूद हैं लेकिन सरकारी उदासीनता के चलते राज्य बनने के बाद पर्यटन विभाग का ठीक से ढांचा ही न बन पाने जैसे कारण राज्य के पर्यटन को गर्त में धकेलते नजर आ रहे हैं। विभाग का न राज्य के पर्यटन व्यवसाइयों पर कोई नियंत्रण है और न वह पर्यटकों की मदद या उन्हें सुविधाएं दिलाने में कोई मदद करता है। केवल योजनाओं के नाम पर सड़क किनारे वीरान पड़े पर्यटक सुविधा केंद्र जरूर खड़े कर दिये जाते हैं। बानगी देखिये, सरोवरनगरी में सैकड़ों की संख्या में होटल व गेस्ट हाउस हैं। इनमें से 144 तो सराय एक्ट में भी पंजीकृत हैं लेकिन इनमें से केवल 72 होटल व 55 पेइंग गेस्ट हाउस ही पर्यटन विभाग को अपने यहां ठहरने वाले सैलानियों के आंकड़े उपलब्ध कराते हैं। इस आधार पर पर्यटन विभाग के सैलानियों संबंधी आंकड़ों को सही मानें तो वर्ष 2010 में 2009 के मुकाबले 37,149 सैलानी अधिक आये जो कि 4.9 फीसद अधिक थे। इसी तरह बीते वर्ष 2011 में 10 के मुकाबले छह फीसद के साथ 47,700 सैलानियों की वृद्धि हुई। यह स्थिति तब है जबकि नगर में पर्यटन सुविधाओं के नाम पर कोई वृद्धि नहीं हुई। इस अवधि में न तो नगर में एक भी अतिरिक्त वाहन पार्किग बनी और न नगर से बाहरी शहरों से ‘कनेक्टिविटी’ के लिहाज से ट्रेनों में कोई वृद्धि हुई। पूछे जाने पर नगर स्थित पर्यटन सूचना केंद्र के अधिकारी बीसी त्रिवेदी मानते हैं कि नगर में आने वाले सैलानियों की वास्तविक संख्या पांच गुना तक भी हो सकती है। उत्तराखंड होटल ऐसोसिएशन के महासचिव प्रवीण शर्मा का भी मानना है कि नगर में बेहतर सुविधाएं, मुंबई, पंजाब व पश्चिम बंगाल से बेहतर आवागमन के साधन हों तो नगर के पर्यटन को पंख लग सकते हैं। पर्यटन व्यवसायी नगर में होटलों की किराया दरें तय न होने, मनोरंजन के लिए फिल्म थियेटर तक न होने जैसे कारणों को भी नगर की पर्यटन विस्तार की रफ्तार के कम रहने का प्रमुख कारण मानते हैं। 
विदेशी सैलानियों की पसंद हैं बसंत और शरदकाल
नैनीताल। बीते वर्षो में सरोवरनगरी में आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या की वृद्धि दर देसी सैलानियों के मुकाबले अधिक रिकार्ड की गई है। वर्ष 2009 व 10 के बीच वृद्धि दर 24.48 फीसद व 2010 व 11 के बीच वृद्धि दर 32 फीसद रही है। विदेशी पर्यटकों के लिए बसंत व शरद ऋ तुएं नगर में पहुंचने के लिए सर्वाधिक पसंदीदा समय रहते हैं। बीते वर्ष की बात करें तो यहां जनवरी में 762, फरवरी में 944, मार्च में 1128, अप्रैल में 1450, मई में 491, जून में 475, जुलाई में 480, अगस्त में 403, सितम्बर में 489, अक्टूबर में 1024, नवम्बर में 1039 तथा दिसम्बर में 725 विदेशी सैलानी पहुंचे।

नैनीताल में वर्षवार आये सैलानियों की संख्या 
वर्ष      देशी सैलानी      विदेशी सैलानी    कुल 
2009   749556          5722               755278 
2010   786705          7123               793828 
2011   834405          9410               843815

मंगलवार, 31 जनवरी 2012

राष्ट्रपिता को शहीदी दिवस पर 'सूखे' श्रद्धा सुमन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके शहीदी दिवस (30 जनवरी) पर जिला व कुमाऊं मंडल मुख्यालय नैनीताल में कैसे याद किया गया, यह चित्र इसकी बानगी हैं। यहाँ तल्लीताल डांठ पर स्थापित गांधीजी की आदमकद मूर्ति पर आज नए फूल चढ़ाने तो दूर गत 26 जनवरी से चढ़ाये गए सूखे फूलों को भी नहीं हटाया गया। मुख्यालय में आज शायद रविवार होने कि वजह से परंपरागत तौर पर ऐसे मौके पर सुबह 11 बजे बजने वाला साइरन बजाना भी प्रशासन भूल गया। गांधीजी के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले राजनीतिक दलों के बात-बात पर आसमान सर पर उठाने वाले कार्यकर्ताओं ने भी कहीं कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं किया। हाँ, गत 26 जनवरी से ही उनकी मूर्ति के नीचे अपनी मांगों पर सत्याग्रह कर रहे कुमाऊं विश्व विद्यालय के एक सेवानिवृत्त कर्मी ने जरूर आज इस मौके पर अपना आन्दोलन स्थगित रखकर अपनी ओर से 'श्रद्धा सुमन' अर्पित किये। सनद रहे, इसलिए नीचे इस आशय का पोस्टर भी चिपका दिया। 
उल्लेखनीय है कि अपने कुमाऊँ प्रवास के दौरान गांधी जी 14 जून 1929 को इसी स्थान पर आये थे। तब नगर वासियों ने गांधीजी को उनके हरिजन उद्धार कार्यक्रम के लिए इस कदर दिल खोलकर दान दिया था कि गांधीजी अभिभूत हो उठे थे, और इसे जीवन भर याद रखने कि बात कही थी। इधर आज भी यदि गांधीजी की आत्मा यदि कहीं आसपास होगी तो निश्चित ही उन्होंने अपनी मूर्ति की आँखें झुका ली होंगी। 

उल्लेखनीय है की महात्मा गाँधी को तब तत्कालीन गवर्नर मेल्कम हेली ने राज्य अतिथि घोषित किया था, और उनके आतिथ्य व ठहरने का प्रबंध राजभवन में किया गया था, बावजूद वह राजभवन के बजाये निकटवर्ती ताकुला गाँव में गोविन्द लाल साह के घर रुके थे. तभी से इस गाँव को आधिकारिक रूप से 'गांधी ग्राम ताकुला' कहा जाने लगा, लेकिन यह विडम्बना ही कही जायेगी कि वहां भी कभी गांधी जयंती या उनके शहीद दिवस को कोई कार्यक्रम नहीं होते.


यह लेख मूलतः 30 जनवरी २०११ में लिखा गया था, लेकिन इस वर्ष भी हालातों में कोई सुधर या परिवर्तन देखने को नहीं मिला...

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

प्रत्याशी ही नहीं समर्थकों की छवि पर भी मतदाताओं की नजर


शैक्षिक स्तर व जागरूकता बढ़ने का भी है असर, आंख-मूंदकर नहीं कर रहे किसी का समर्थन या विरोध
नवीन जोशी, नैनीताल। उत्तराखंड के मतदाताओं में अब वोट को लेकर जागरूकता आ गई है। मतदाता न सिर्फ उम्मीदवार की छवि को आधार बना रहे हैं, बल्कि उनके प्रमुख समर्थकों पर भी नजरें गड़ाएं हैं। छवि बनाने में भी एक पक्षीय निर्णय नहीं लिया जा रहा, वरन तर्क की कसौटी पर भी छवियों को कसने की कोशिश की जा रही है। प्रदेश के मतदाताओं में बढ़े साक्षरता के स्तर को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
 इस चुनाव में राज्य की जनता प्रचार के लिए पहुंच रहे उम्मीदवारों से कई सवाल कर रही है। लोग नेताओं से स्थानीय समस्याओं का समाधान पूछ रहे हैं और नेताओं द्वारा किए जा रहे वादों की हकीकत पूछ रहे हैं। यह पहली बार हुआ है कि लोग महज नेताजी का भाषण ही नहीं सुन रहे, उनसे सवाल कर विकास कार्यों का हिसाब भी मांग रहे हैं। जनता अपने विधायक से चाहती है कि वह अपने क्षेत्र से भली-भांति वाकिफ हो, वह विपक्ष में होने जैसे विषम राजनीतिक हालातों में भी स्वयं को स्थापित कर मजबूती से जनता की समस्याओं को विधायिका में रखने में समर्थ हो। विस क्षेत्र और प्रदेश की जनता कमोबेश ऐसी ही कसौटी पर अपने विधायक प्रत्याशियों को कस रही है। ऐसे में यदि किसी प्रत्याशी के समर्थक उनसे अपने पक्ष में मतदान करने को कहते हैं तो कई बार वह प्रत्याशी को लेकर ऐसे सवालात भी कर रहे हैं। यह मतदाताओं के जागरूक होने का संकेत माना जा सकता है। जातीय-क्षेत्रीय आधार पर बात करने वाले समर्थकों को कई बार मतदाता सीधे ‘ना’ कहने से भी गुरेज नहीं कर रहे। प्रत्याशियों के साथ ही उनके समर्थकों की छवि भी देखी जा रही है। ‘अभी से प्रत्याशी ऐसे समर्थकों से घिरा है तो आगे जीतने पर क्या करेगा’ ऐसी चिरौरियां भी पीठ पीछे की जा रही हैं और कई बार इसके उलट अच्छी छवि के समर्थकों पर विश्वास भी जताया जा रहा है कि ऐसे लोग साथ हैं तो आगे भी प्रत्याशी ठीक कार्य ही करेगा। 

महिलाएं निभा रहीं प्रचार में प्रमुख भूमिका
नैनीताल। हालिया दौर में महिलाओं के घर की चौखट से कार्य के लिए बाहर निकलने का असर चुनाव प्रचार पर भी दिख रहा है। पुरुष मतदाता अपने समर्थक प्रत्याशी के खुले समर्थन में आकर अन्य से नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते और चुनाव प्रचार से दूर ही रहते हैं। वहीं निम्न- मध्यम के साथ ही उच्च-मध्यम वर्ग की महिलाएं आजादी का लुत्फ चुनाव प्रचार में अपनी बढ़-चढ़कर भागेदारी निभाकर ले रही हैं। घर-घर चल रहे प्रचार- कैंपेनिंग में महिलाओं का उपयोग प्रत्याशियों को भी सहज एवं प्रभावी लग रहा है। मतदाता भी उनकी बात अधिक सहजता से सुन रहे हैं।

सोमवार, 23 जनवरी 2012

भाजपा का अगला कार्यकाल पहाड़ को होगा समर्पित : बचदा


पीपीपी मोड में 50 हजार करोड़ रुपये के निवेश से पहाड़ में उद्योग व किसानों को सस्ते लोन देने का वादा
जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर पार्टी को बेहद सचेत बताया
नैनीताल (एसएनबी)। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं चुनाव घोषणा पत्र समिति के संयोजक बची सिंह रावत ‘बचदा’ ने कहा कि वर्तमान कार्यकाल में भाजपा ने मैदानी क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाई है जबकि अगला कार्यकाल पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के नाम रहेगा। पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र का हवाला देते हुए उन्होंने पीपीपी मोड में पहाड़ पर 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश करवाने, औद्योगिक विकास करने, लघु एवं सीमांत किसानों को महज दो फीसद ब्याज पर कृषि ऋ ण देने तथा चार लाख हेक्टेयर बेनाप रक्षित वन भूमि का प्रबंधन कर विकास कायरे को गति देने एवं भूमिहीनों को भूमि देने तथा फलों के बीमा की योजना लाने जैसे कई वायदे किये हैं। सोमवार को नगर के पत्रकारों से वार्ता में बचदा ने कहा कि भाजपा उत्तराखंड की अवधारणा से जुड़े मुद्दों के प्रति खासी सचेत है। खेती, किसान और भूमि भाजपा के चुनाव घोषणा पत्र में प्रमुख मुद्दे हैं। वर्ग चार जैसी भूमि पर दशकों से काबिज लोगों को स्वामित्व परिवर्तन के अधिकार दिये जाएंगे। सरकार ने 1893 के अंग्रेजों के जमाने के कानून को समाप्त कर करीब चार लाख हेक्टेयर बेनाप रक्षित भूमि को मुक्त कराया है, अब अगले कार्यकाल में इसका प्रबंधन करेंगे। इस मौके पर पार्टी जिलाध्यक्ष भुवन हरबोला, विस संयोजक बालम मेहरा, जिला मंत्री विवेक साह, मनोज साह, मनोज जोशी, हिमांशु जोशी आदि भी मौजूद थे। 

निशंक का बचाव किया 
नैनीताल। भाजपा के वरिष्ठ नेता बची सिंह रावत ने टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल द्वारा पूर्व सीएम डा. निशंक पर की गई टिप्पणी पर पार्टी के पूरी मजबूती से उनके साथ होने की बात कही। उन्होंने कहा कि निशंक उतने ही पाक-साफ हैं, जितना कोई और। उन्होंने कहा कि कायरे में अनियमितता हो सकती है पर भ्रष्टाचार का सवाल ही नहीं है। उन पर आरोप लगाने वालों को पहले शिकायत दर्ज करनी चाहिए।
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नैनीताल में कांग्रेस पर 21 वर्ष का बनवास तोड़ने की चुनौती

मंडल मुख्यालय की महत्वपूर्ण सीट पर भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर के आसार  
नवीन जोशी, नैनीताल। कुमाऊं की नैनीताल सुरक्षित सीट पर भाजपा के हेम आर्य और कांग्रेस की सरिता आर्य के बीच सीधी टक्कर के आसार हैं जबकि बसपा त्रिकोण बनाने की कोशिश में है। वि प्रसिद्ध पर्यटन नगरी की इस सीट पर कांग्रेस को 21 वर्ष के वनवास को तोड़ने की तथा भाजपा के समक्ष अपनी मौजूदा सीट को प्रत्याशी बदलने के बाद भी बरकरार रखने की चुनौती है। मंडल मुख्यालय होने के नाते नैनीताल सीट पर देश-प्रदेश की नजर रहती है, इस लिहाज से यह सीट प्रदेश की महत्वपूर्ण सीटों में शुमार है। देश-दुनिया के सैलानी यहां तनाव-समस्याओं का बोझ उतारने के लिए आते हैं, तो खासकर सीजन में नगरवासियों को सैलानियों की अधिक संख्या का दंश झेलना पड़ता है। सैलानियों के वाहनों के बीच नगरवासियों के पैदल निकलने तक को जगह नहीं मिलती और उनके हिस्से की पेयजल आपूर्ति भी सैलानियों के लिए होटलों को कर दी जाती है। पर्यटन से अधिक लाभ कमाने वाले होटलों पर किसी का नियंत्रण नहीं है, उनकी दरें तक तय नहीं जबकि नाव, रिक्शे, घोड़े व टैक्सी वालों की दरें तय कर शिंकजा कसा हुआ है। निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में ‘दीपक तले अंधेरा’ जैसी स्थिति है, उनकी बिजली, गैस जैसी सुविधाएं शहर हड़प जाता है तो बिना शुद्ध पानी के लिए सूखे प्राकृतिक जल स्रेतों पर ही निर्भरता रहती है। इधर हालिया परिसीमन में नैनीताल सीट अनुसूचित कोटे में चली गई है, साथ ही परिसीमन से यहां का भूगोल बदल गया है। एक हिस्सा कटकर कालाढूंगी में चला गया है जबकि खत्म हुई मुक्तेर का बेतालघाट-कोश्यां कुटौली का हिस्सा इस सीट में जुड़ गया है। कालाढूंगी से भाजपा ने पिछले विस चुनावों में भाजपा के खड़क सिंह बोहरा की तथा बेतालघाट ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य को विस पहुंचाने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इधर नगर क्षेत्र में उक्रांद के पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल बीते दो चुनावों में बढ़त हासिल करते रहे। अब जबकि जंतवाल मैदान में नहीं हैं, ऐसे में उक्रांद के वोटरों के समक्ष भाजपा व कांग्रेस में से एक को चुनने का असमंजस है। नैनीताल सीट में 50,297 पुरुष व 44,063 महिला मतदाता हैं जिनमें क्षेत्रीय आधार पर नैनीताल नगर क्षेत्र में करीब 29,052, भवाली में करीब साढ़े 15 हजार, बेतालघाट क्षेत्र में 14 हजार, गरमपानी क्षेत्र में 21 हजार, खुर्पाताल में तीन हजार तथा कोटाबाग के पर्वतीय क्षेत्रों में करीब आठ हजार मतदाता निवास करते हैं, इनमें सर्वाधिक 37 हजार के करीब क्षत्रिय, 28 हजार ब्राह्मण, 18 हजार अनुसूचित जाति, 11 हजार मुस्लिम तथा करीब एक हजार सिख व अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाता हैं। 1986 में चुनाव जीते किशन सिंह तड़ागी इस सीट से आखिरी कांग्रेसी विधायक रहे। 91 की रामलहर से लगातार तीन चुनाव भाजपा के बंशीधर भगत यहां से चुनाव जीते। 2002 में उक्रांद प्रत्याशी डा. नारायण सिंह जंतवाल ने भाजपा से यह सीट झटक ली। गत 2007 के विस चुनावों में भाजपा के खड़क सिंह बोहरा ने पुन: यह सीट हासिल कर भाजपा का एक बार पुन: नैनीताल से परचम फहराया। एंटी इनकम्बेंसी की बात करें तो नैनीताल विस के पुराने हिस्से में क्षेत्रीय भाजपा विधायक बोहरा को लेकर तथा मुक्तेर के हिस्से में वहां के सिटिंग विधायक कांग्रेस अध्यक्ष यशपाल आर्य के खिलाफ मतदाताओं में एक हद तक नाराजगी दिखती है। पर्यटन नगरी होने के कारण नगर क्षेत्र में जहां आम लोग खासकर सीजन के दिनों में पर्यटकों के भारी संख्या में आने के कारण परेशानी महसूस करते हैं, व नगर की सड़कों- चौराहों के चौड़ीकरण, पार्किग स्थलों के विकास, नगर में साफ-सफाई, जिला अस्पताल में बेहतर सुविधाएं व डॉक्टरों की तैनाती जैसी प्रमुख आवश्यकता मानते हैं, और पर्यटन व्यवसायी नगर को बेहतर ‘कनेक्टिविटी’, मनोरंजन के लिए सिनेमा हॉल न होने जैसी समस्याएं गिनाते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोग चाहते हैं कि उन्हें भी ग्रामीण पर्यटन के जरिये पर्यटन नगरी के करीब होने का लाभ मिले। मुख्यालय आने- जाने को यातायात की सस्ती सुविधाएं सुलभ कराई जाएं। गांव व शहर के बीच की चौड़ी खाई को पाटने की भी ग्रामीण आवश्यकता जताते हैं। बहरहाल, नगर में चुनाव प्रत्याशी की छवि को लेकर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में किये गये कायरे और भविष्य में उससे कार्य कराये जा सकने की संभावनाओं पर निर्भर हो चला है। बसपा के संजय कुमार भी मुकाबले को तीसरा कोण देने की कोशिश में हैं, जबकि उक्रांद-पी से विनोद कुमार, सपा से देवानंद व निर्दलीय पद्मा देवी भी मैदान में हैं।
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शनिवार, 21 जनवरी 2012

प्रत्याशी आजमा रहे ‘माउथ पब्लिसिटी’ का फंडा

मोहल्लों-पड़ावों  के दुकानदारों को मिल रहीं प्रत्याशी की बढ़त बताने को गड्डियां                     


नवीन जोशी,  नैनीताल। राम सिंह जी की कालाढूंगी रोड पर एक दुकान है। एक प्रत्याशी उन्हें गड्डी पकड़ा गया है। बोल कर गया है कि वह चाहे उसे वोट दे या न दे, लेकिन उसे दुकान पर आने वाले ग्राहकों के पूछने या चर्चा करने पर कहना है कि वह (गड्डी देने वाला प्रत्याशी) जीत रहा है। राम सिंह जितना पूरे दिन में नहीं कमा पाते, केवल बातें करने के कमा रहे हैं। क्षेत्र में ‘माउथ पब्लिसिटी’ का यह नया फंडा खूब चल रहा है। चुनाव में प्रत्याशी अपनी जीत के लिए हर तरह का हथकंडा अपनाते हैं। प्रबंध गुरु कहते हैं कि किसी भी वस्तु या सेवा की मांग बढ़ाने में ‘माउथ पब्लिसिटी’ सबसे कारगर हथियार साबित होती है। आप नई गाड़ी खरीदने जा रहे हैं, लेकिन आपको गाड़ी के बारे में कोई जानकारी नहीं है, तो किसी न किसी से जरूर पूछेंगे कि कौन सी गाड़ी बेहतर होगी। पहले दो-तीन लोगों ने आपको जो गाड़ी बेहतर बता दी, वह आपके मन मस्तिष्क में बैठ जाएगी और उसे आप खरीद लाएंगे। ऐसे ही यह भी हो सकता है कि किसी गाड़ी के बारे में बुरी ‘फीड बैक’ आये और आप चाहते हुए भी उसे न लें। हमारा देश भावना प्रधान लोगों का देश है, और खासकर राजनीति में भावनाओं के आधार पर ही प्रत्याशियों व पार्टियों की अच्छी-बुरी छवि बना करती है। दो दशक पूर्व गणोश जी के दूध पीने और अभी हाल में लखनऊ में सोते ही बुत में तब्दील होने जैसी अफवाहें माउथ पब्लिसिटी के कारण ही इतनी अधिक चर्चा में रहीं। इसी फंडे पर क्षेत्र की एक पार्टी भी अमल कर रही है। उसके प्रत्याशी पूर्व में भी इस फंडे को आजमा चुके हैं। अब उनकी पार्टी इस चुनाव में भी इस फंडे को आजमा रही है, और बताया जा रहा है कि इस फंडे पर बीते कुछ दिनों में उनकी पार्टी ने ठीक-ठाक बढ़त भी बना ली है। आगे देखने वाली बात यह होगी कि माउथ पब्लिसिटी का यह फंडा यहां के चुनाव परिणामों को किस तरह प्रभावित करता है।
जिसकी पी दारू उसकी बताई हवा
नैनीताल। बाहर से देखने में इस बार के विस चुनाव भले चुनाव आचार संहिता के भय से जितने साफ- सुथरे चल रहे हों, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा नहीं है। वहां कच्ची-पक्की दारू खूब बंट रही है, साथ ही बाहर से मुग्रे ले जाने में आयोग की नजर पड़ने के भय से ग्रामीण क्षेत्रों में ही पलने वाले बकरों का मतदाताओं को भोग लगाया जा रहा है। "क्या है रुझान" पूछने पर मतदाता पहले सामने वाले को भांपता है, और फिर उसी के पक्ष में ‘हवा’ होने की बात कहने लगता है।


मजदूर संभाल रहे चुनाव प्रचार की बागडोर
नाम वापसी से अब तक कुमाऊं में 50 करोड़ का कारोबार प्रभावित
गौरव पाण्डेय, हल्द्वानी। चुनावी सरगर्मी के बीच बाजार से मजदूर गायब हो गये हैं। इसके चलते कई कारोबारी गतिविधियां ठप हो गई हैं। नाम वापसी से अब तक कुमाऊं में इससे 50 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित होने का अनुमान है। यह स्थिति मतदान के कुछ दिन बाद तक बनी रह सकती है। दरअसल मजदूर प्रत्याशियों के चुनावी अभियान की बागडोर संभाले हुए हैं। एक अनुमान के मुताबिक कुमाऊं में करीब चार लाख मजदूर हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, दिल्ली आदि के साथ ही नेपाली मजदूर भी शामिल हैं, जबकि कई स्थानीय मजदूर हैं। ये मजदूर निर्माण, परिवहन, कैटरिंग, खनन, साज-सज्जा, उद्योग समेत तमाम कारोबारों से जुड़े हैं, लेकिन इन दिनों इनका टोटा है। यह सिलसिला जनवरी से शुरू हुआ था। बाजार से मजदूर लगभग पूरी तरह गायब हो गए हैं। इससे कारोबारियों के साथ ही आम लोगों के लिए भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। मजदूर उपलब्ध न होने से तमाम व्यवसाय ठप से हो गए हैं। इससे कारोबार में लगातार गिरावट आ रही है। जानकारों का मानना है कि कुमाऊं में अब तक इससे 50 करोड़ से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। सर्वाधिक असर निर्माण क्षेत्र पर पड़ा है। छोटे कारोबारी ज्यादा हलकान हैं। दूसरी ओर मजदूर इन दिनों लोकतंत्र के पर्व में मौज काट रहे हैं। ये विभिन्न राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनाव में मशगूल हैं और प्रत्याशियों की गैदरिंग का एक बड़ा आधार बने हुए हैं। इन्हें प्रत्याशियों के जनसंपर्क, चुनावी सभा, दावतों में देखा जा सकता है। कई प्रत्याशियों ने मजदूरों को ठेकेदारों के मार्फत मतदान तक बुक कर लिया है। इससे माह भर कारोबारी गतिविधियों के ठप रहने के आसार बने हुए हैं।