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शुक्रवार, 6 मई 2011

कुमाऊं विवि में सैकड़ों 'मुन्नाभाई' दे रहे परीक्षा

150 परीक्षार्थियों को भेजा गया नोटिस
नवीन जोशी नैनीताल। कुमाऊं विविद्यालय के अधीन मंडल के महाविद्यालयों व परिसरों में सैकड़ों 'मुन्नाभाई' परीक्षा दे रहे हैं। करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों के इंटरमीडिएट के अंकपत्र और प्रमाणपत्र फर्जी होने की पुष्टि हो गई है। इनमें से 150 को नोटिस भेजे गए हैं। ऐसे कई परीक्षार्थी परीक्षा देने से रोक दिये गए हैं, जबकि अनेक अब भी परीक्षा दे रहे हैं। 
कुमाऊं विवि इन दिनों चल रही वाषिर्क परीक्षाओं के कारण हर ओर से हमले झेल रहा है, लेकिन समस्या की असल वजह क्या है, इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। 'राष्ट्रीय सहारा'  ने जब वजह जानने की कोशिश की तो पता चला कि विवि के परीक्षा विभाग और बड़ी संख्या में कर्मियों की ऊर्जा पहले वर्ष की परीक्षा दे रहे 'मुन्नाभाइयों' की पहचान करने में नष्ट हो रही है। डेढ़ सौ से अधिक मुन्ना भाई बीए प्रथम वर्ष में बताए गए हैं। बीकाम प्रथम वर्ष में तीन दर्जन से अधिक ऐसे परीक्षार्थी पकड़ में आए हैं, जिनके इंटरमीडिएट के अंकपत्र और प्रमाणपत्र फर्जी हैं। अधिकांश फर्जी प्रमाणपत्र दिल्ली हायर सेकेंडरी बोर्ड एवं वृंदावन ओपन बोर्ड से निर्गत हैं। कुमाऊं विवि के परीक्षा नियंत्रक डा. जीएल साह ने स्वीकार किया कि करीब ढाई सौ परीक्षार्थियों के इंटर के प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं। इनमें से करीब 150 को नोटिस भेजा जा चुका है। 
अग्रसारण शुल्क के कारण भरवा दिए अधिक फार्म
पंतनगर निवासी मीरा कुमारी नाम की एक छात्रा का शिक्षाशास्त्र विषय से व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरा। इसे रुद्रपुर महाविद्यालय में जमा कराया गया था। इधर 11 मई से उसकी परीक्षा शुरू होनी हैं, लेकिन प्रवेशपत्र नहीं मिला। रुद्रपुर महाविद्यालय ने अपने यहां शिक्षाशास्त्र विषय न होने के कारण उसकी परीक्षा कराने से असमर्थता जाहिर की, और हल्द्वानी भिजवा दिया। इसके बाद वह हल्द्वानी-रुद्रपुर के चक्कर काटती हुई विवि प्रशासनिक भवन पहुंची और आखिर यहां भी प्रवेशपत्र न मिलने से शुल्क वापस लेकर परीक्षा छोड़ने को मजबूर हुई। जानकार बता रहे हैं कि महाविद्यालयों को प्रति स्नातक फार्म 40 व प्रति स्नातकोत्तर छात्र 60 रुपये परीक्षा फार्मो को जांच कर भेजने के लिए अग्रसारण शुल्क के रूप में मिलते हैं। अकेले रुद्रपुर महाविद्यालय को अग्रसारण शुल्क से दो लाख रुपये से अधिक प्राप्त हो रहे हैं। अधिक धन की चाह में महाविद्यालयों ने क्षमता से अधिक व गलत फार्म ले लिए हैं और उन्हें जांच किये बिना कुविवि को भेज दिया।
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