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सोमवार, 2 मई 2011

दुनिया की धरोहर है हिमालय : प्राइस

विकास के लिए संसाधनों का करना होगा सुनियोजित उपयोग
नवीन जोशी नैनीताल। वर्ष 2007 में अमेरिकी उप राष्ट्रपति अल गोर और भारतीय वैज्ञानिक डा. आरके पचौरी के साथ संयुक्त रूप से नोबल पुरस्कार प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक प्रो. मार्टिन प्राइस ने कहा कि हिमालय भारत और दक्षिण एशिया ही नहीं वरन पूरी दुनिया का धरोहर है। यहां संसाधनों के अपार भंडार हैं मगर इनका लाभ दूसरे लोग उठा रहे हैं। यहां रह रहे लोग इसके लाभों से अछूते हैं। लिहाजा हिमालयी क्षेत्रों के संसाधनों के मूल्यांकन एवं उनके सुनियोजित उपयोग करने की आवश्यकता है, ताकि यहां से हो रहे प्रतिभा पलायन को रोका जा सके और लोग यहां अपनी प्रतिभा का उपयोग करने के लिए आएं। नैनीताल क्लब में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान 'राष्ट्रीय सहारा' से प्रो. प्राइस ने हिमालयी क्षेत्र के लोगों को अपने संसाधन और सेवाओं के समुचित मूल्यांकन करने की सीख दी। उनका कहना था कि हिमालयी क्षेत्रों में दुनिया की अनूठी व अचूक औषधियां हैं। केवल इनसे यह क्षेत्र दुनिया का सबसे धनी क्षेत्र बन सकता है। उन्होंने यहां पनबिजली की सर्वाधिक संभावनाएं बताते हुए छोटे बांध ही बनाए जाने की राय दी। उन्होंने कहा हिमालय में छोटे बांध उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि हिमालय पूरी दुनिया को सर्वाधिक प्रभावित करने वाला पर्वत है। इससे केवल दक्षिण एशिया में ही 1.3 बिलियन लोग प्रभावित होते हैं। प्रतिभा की दिशा पहाड़ की ओर करने के लिए उन्होंने मंत्र सुझाया कि बाहर से आने वाले लोगों को पहाड़ों तक संचार की मोबाइल, सेटेलाइट फोन व यातायात व आवासीय सुविधा देनी होगी। ऐसा होने पर यहां शोध के लिए ही बड़ी संख्या में देशी-विदेशी लोग पहुंचेंगे।
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