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सोमवार, 28 फ़रवरी 2011

81 के बुढापे में 18 सी जवानी

नवीन जोशी, नैनीताल। जी हां ! 81 की उम्र में यदि किसी व्यक्ति में 18 की उम्र जैसी चुस्ती-फुर्ती हो सकती है। विश्वास न हो, तो आपको नगर के 81 वर्षीय पूर्व प्रधानाचार्य एवं उत्तराखंड बाक्सिंग एसोसिएशन के उपाध्यक्ष कुंदन लाल साह से मिलना होगा। साह बीते करीब 45 वर्षो से योग कर रहे हैं, और योग को ही वह अपनी इस चुस्ती-फुर्ती का कारण मानते हैं। वह आज भी रोज दिनचर्या के आवश्यक अंग के रूप में योग के कई कठिनतम् आसन करते हैं, साथ ही लोगों को सिखाते भी हैं।
इस संवाददाता ने भी जब योग की इस जीवंत किवदंती श्री साह के यौगिक आसनों का प्रदर्शन देखा, तो दंग हुए बिना नहीं रहा सका। यह कमोबेश अकल्पनीय था कि जन्म प्रमाण पत्र के अनुसार एक अप्रैल 1930 को (जबकि उनके अनुसार प्रमाण पत्रों में तिथि एक वर्ष घटाई गई थी) पैदा हुए श्री साह बज्रासन, गौमुखासन, कंचासन, विकर्ण धनुरासन, एकपाद शुप्त शीर्षासन, उत्तिष्ठ कूर्मासन, ऊंकारासन, योग दंडासन व पश्चिमोत्तानासन सरीखे बेहद कठिन आसनों का सामान्यतया शीतकाल में पहने जाने वाले अधिक वस्त्रों में भी बेहद आसानी से प्रदर्शन कर रहे थे। साह बताते हैं कि डेढ़ वर्ष की अवस्था में ही पिता उन्हें छोड़ गए थे। मां ही उनकी गुरु थीं, उन्हीं से योग सीखा। राउमावि कोटाबाग से शिक्षण शुरू किया, और बाद में प्रांतीय शिक्षा सेवा (पीईएस) परीक्षा उत्तीर्ण कर यहीं प्रधानाचार्य हो गऐ। बाद में नैनबाग-टिहरी, तथा पिथौरागढ़ के दोबांश, वर्दाखान, थल व बेरीनाग में प्रधानाचार्य रहे व वर्ष 1987-88 में सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान में नेहरू युवा केंद्र के विधि सलाहकार व योग प्रशिक्षक संदर्भ व्यक्ति, उत्तराखंड बाक्सिंग संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष, नगर के रोलर-स्केटिंग संघ अध्यक्ष तथा हिमालय पर्यावरण संस्थान पिथौरागढ़ के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में विभिन्न सांस्कृतिक-सामाजिक संस्थाओं व खेल संस्थाओं से जुड़े हैं। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान भी वह सेवानिवृत्ति के बाद भी युवाओं के साथ सक्रिय रहे तथा 1990 में 10 दिन फतेहगढ़ जेल रहे। लेकिन इतनी संस्थाओं में सक्रियता का राज उनके वैयक्तिक जीवन में है, और उसकी धुरी योग के गिर्द घूमती है। साह बताते हैं, जीवन हर क्षेत्र में तीन भुजाओं का संतुलन है, यह तीन भुजाएं हैं-आचार-विचार व व्यवहार, सदाचार-संयम व अनुशासन, व्यस्त-मस्त और स्वस्थ, पति-पत्नी व बच्चे, जन्म-जीवन व मरण, पृथ्वी-आकाश व पाताल तथा शरीर की तीन व्याधियां कफ-पित्त व बात। त्रिभुज की तीन भुजाओं का संतुलन विचार-कर्म व परिणाम तथा प्राणायाम, ध्यान व आसन से संधान किऐ जाते हैं, फलस्वरूप जीवन स्वस्थ व सुंदर बनता है। लिहाजा वह त्रिपाद मंत्र योग करते-कराते हैं।
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