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मंगलवार, 10 जनवरी 2012

30 को शर्तिया होगी बर्फबारी: कोटलिया

ऊंची चोटियों सहित बागेश्वर की घाटियों तक होगी बर्फबारी
नवीन जोशी नैनीताल। मौसम वैज्ञानिक कुमाऊं विवि के भू-विज्ञान विभाग में यूजीसी के प्रोफेसर बीएस कोटलिया का दावा है कि उत्तराखंड में विस चुनाव की तिथि (30 जनवरी) को भारी बर्फबारी होगी। इस दिन न केवल ऊंची चोटियों वरन बागेश्वर जैसी घाटी के स्थान तक बर्फ गिर सकती है। कोटलिया 30 को चुनाव हो पाने के प्रति भी आशंकित हैं। इसके साथ ही उनका दावा है कि जनवरी के मुकाबले फरवरी में अधिक सर्दी व बर्फबारी होने वाली है। उनका दावा है कि इस वर्ष उत्तराखंड में ठंड का 50 वर्षो का रिकार्ड टूट चुका है और ठंड से अभी निजात नहीं मिलेगी। 
प्रदेश के साथ ही देश-विदेश में गुफाओं में पायी जाने वाली शिवलिंग के आकार की चट्टानों के जरिये हजारों वर्ष पूर्व के इतिहास पर अध्ययन करने वाले प्रो. कोटलिया ने ‘राष्ट्रीय सहारा’ से बातचीत में यह दावे किये। इससे पूर्व वह वर्ष 2007 के सर्वाधिक गर्म वर्ष होने, 2011 में 50 वर्ष की सर्दी के रिकार्ड टूटने जैसी मौसम संबंधी भविष्यवाणियां भी कर चुके हैं। प्रदेश में कई हजारों वर्ष पुरानी गुफाओं को खोजने का श्रेय भी उन्हें जाता है। इधर उन्होंने ताजा दावा उत्तराखंड में होने जा रहे विस चुनाव को लेकर किया है। उन्होंने आशंका जताई है कि तय तिथि पर चुनाव नहीं हो पाएंगे। उन्होंने दावा किया कि 30 जनवरी को प्रदेश के नैनीताल, मुक्तेश्वर, कपकोट, गोपेश्वर, जोशीमठ जैसे ऊंचाई वाले सभी क्षेत्रों में बर्फबारी होगी जबकि बागेश्वर जैसी घाटी तक भी बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने बताया कि उनके पास मुक्तेश्वर के 130 वर्षो के मौसम संबंधी रिकार्ड उपलब्ध हैं जो इस वर्ष टूट चुके हैं। 
11 वर्ष में सौर चक्र से भी प्रभावित होता है मौसम  
प्रो. कोटलिया के अनुसार धरती पर प्रकाश के साथ ऊष्मा यानी गर्मी के सबसे बड़े श्रोत सूर्य की सक्रियता का चक्र 11 वर्ष का होता है और यह सक्रियता पृथ्वी पर सर्दी-गर्मी को बढ़ाने वाली भी साबित होती है। इस आधार पर भी वर्ष 2003-04 में पड़ी सर्दी की 11 वर्ष बाद 2011-12 की सर्दियों में पुनरावृत्ति होने की वैज्ञानिकों को आशंका है। कोटलिया के अनुसार उनके द्वारा किये गये हजारों वर्ष के मौसम के अध्ययन में 11 वर्षीय मौसमी चक्र की पुष्टि हुई है। 
ला-निना का भी है प्रभाव 
इस वर्ष हो रही भारी बर्फबारी व कड़ाके की ठंड प्रशांत महासागर से उठने वाली ला-निना नाम की सर्द हवाएं भी बताई जा रही हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत से उठने वाली गर्म हवाएं-अल निनो व सर्द हवाएं-ला निना दुनिया भर के मौसम को प्रभावित करती हैं। दो से सात वर्षो में इसका प्रभाव बढ़ता है।
मूलतः यह समाचार इस लिंक को क्लिक कर राष्ट्रीय सहारा के 11 जनवरी 2012 के अंक के प्रथम पृष्ठ पर देखा जा सकता है 
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