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मंगलवार, 5 अप्रैल 2011

जलजलों से सुरक्षित नहीं पहाड़


वैज्ञानिकों ने कहा कि फिलहाल भूकंप से डरने की जरूरत नहीं मगर रहें सावधान
नवीन जोशी नैनीताल। भारत-नेपाल सीमा पर काली नदी के पार आए भूकंप के झटके से कई आशंकाओं को बल मिला है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेशवासियों को भूकंप के ताजा झटकों के मद्देनजर फिलहाल डरने की  जरूरत नहीं है, मगर उत्तराखंड में इस भूगर्भीय खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता। प्रदेश से गुजरने वाले दो प्रमुख भ्रंशों 'मेन सेंट्रल थ्रस्ट' व 'नार्थ अल्मोड़ा थ्रस्ट' की भूगर्भीय हलचल खतरे की ओर इशारा कर रही है। 
हिमालय उत्तरी सिरे पर एशियाई और तिब्बती भूगर्भीय के प्लेटों के बीच टकराव हो रहा है। एशियाई प्लेट प्रतिवर्ष 30 से 40 मिमी की दर से तिब्बती प्लेट में समा रही है। इससे भारी ऊर्जा एकत्र हो रही है। उत्तराखंड में तीन बड़े भूगर्भीय भ्रंश थ्रस्ट मेन सेंट्रल थ्रस्ट यानी एमसीटी, नार्थ अल्मोड़ा थ्रस्ट यानी एनएटी और मेन बाउंड्री थ्रस्ट यानी एमबीटी मौजूद हैं। इनमें पृथ्वी के भीतर उत्पन्न ऊर्जा के कारण हलचल होती है। एमसीटी अरुणांचल और नेपाल से होता हुआ प्रदेश के धारचूला और मुनस्यारी से कपकोट और गढ़वाल में चमोली-उत्तरकाशी तक जाता है। एनएटी पिथौरागढ़ के rameshwar घाट से सेराघाट होता हुआ अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट से निकलता है जबकि एमबीटी चंपावत के चल्थी से नैनीताल, रामनगर होता हुआ हरिद्वार, देहरादून के उत्तर से होता हुआ पंजाब की ओर निकल जाता है। काफी समय से एमसीटी व एनएटी में हलचल जारी है, जबकि एमबीटी कुछ हद तक शांत है। इसी आधार पर उत्तराखंड के हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिलों को भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील जोन चार में तथा शेष जिलों को अति संवेदनशील जोन पांच में रखा गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे बड़े भूकंपों से पुन: जल्द बड़े भूकंपों के आने की संभावना कम तो होती है, पर खत्म नहीं होती।


भूकंपमापी केंद्र अगले महीने तक
नैनीताल। मालूम हो कि कुमाऊं मंडल के विभिन्न केंद्रों से जुड़ा मुख्यालय स्थित भूकंप मापी केंद्र करीब डेढ़ वर्ष पूर्व बिजली गिरने से खराब हो गया था। इसके स्थान पर अब भारत सरकार का पृथ्वी विज्ञान विभाग एक करोड़ रुपये लागत का नया भूकंप मापी केंद्र लगने जा रहा है। प्रस्तावित केंद्र के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर प्रो. चारु चंद्र पंत ने बताया कि इसके उपकरण दिल्ली पहुंच चुके हैं। अगले माह तक इसके नगर में स्थापित होने की उम्मीद है।
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