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मंगलवार, 31 जनवरी 2012

राष्ट्रपिता को शहीदी दिवस पर 'सूखे' श्रद्धा सुमन

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनके शहीदी दिवस (30 जनवरी) पर जिला व कुमाऊं मंडल मुख्यालय नैनीताल में कैसे याद किया गया, यह चित्र इसकी बानगी हैं। यहाँ तल्लीताल डांठ पर स्थापित गांधीजी की आदमकद मूर्ति पर आज नए फूल चढ़ाने तो दूर गत 26 जनवरी से चढ़ाये गए सूखे फूलों को भी नहीं हटाया गया। मुख्यालय में आज शायद रविवार होने कि वजह से परंपरागत तौर पर ऐसे मौके पर सुबह 11 बजे बजने वाला साइरन बजाना भी प्रशासन भूल गया। गांधीजी के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले राजनीतिक दलों के बात-बात पर आसमान सर पर उठाने वाले कार्यकर्ताओं ने भी कहीं कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं किया। हाँ, गत 26 जनवरी से ही उनकी मूर्ति के नीचे अपनी मांगों पर सत्याग्रह कर रहे कुमाऊं विश्व विद्यालय के एक सेवानिवृत्त कर्मी ने जरूर आज इस मौके पर अपना आन्दोलन स्थगित रखकर अपनी ओर से 'श्रद्धा सुमन' अर्पित किये। सनद रहे, इसलिए नीचे इस आशय का पोस्टर भी चिपका दिया। 
उल्लेखनीय है कि अपने कुमाऊँ प्रवास के दौरान गांधी जी 14 जून 1929 को इसी स्थान पर आये थे। तब नगर वासियों ने गांधीजी को उनके हरिजन उद्धार कार्यक्रम के लिए इस कदर दिल खोलकर दान दिया था कि गांधीजी अभिभूत हो उठे थे, और इसे जीवन भर याद रखने कि बात कही थी। इधर आज भी यदि गांधीजी की आत्मा यदि कहीं आसपास होगी तो निश्चित ही उन्होंने अपनी मूर्ति की आँखें झुका ली होंगी। 

उल्लेखनीय है की महात्मा गाँधी को तब तत्कालीन गवर्नर मेल्कम हेली ने राज्य अतिथि घोषित किया था, और उनके आतिथ्य व ठहरने का प्रबंध राजभवन में किया गया था, बावजूद वह राजभवन के बजाये निकटवर्ती ताकुला गाँव में गोविन्द लाल साह के घर रुके थे. तभी से इस गाँव को आधिकारिक रूप से 'गांधी ग्राम ताकुला' कहा जाने लगा, लेकिन यह विडम्बना ही कही जायेगी कि वहां भी कभी गांधी जयंती या उनके शहीद दिवस को कोई कार्यक्रम नहीं होते.


यह लेख मूलतः 30 जनवरी २०११ में लिखा गया था, लेकिन इस वर्ष भी हालातों में कोई सुधर या परिवर्तन देखने को नहीं मिला...
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