रविवार, 12 जून 2011

नैनीताल पालिका पर सीबीआई का शिंकजा


लेक ब्रिज ठेके का मामला नियमों को ताक पर रखकर दे दिया गया था ठेका, सीबीआई कर रही जांच
नैनीताल (एसएनबी)। नगर पालिका नैनीताल के विरुद्ध उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर सीबीआई की जांच प्रारंभ हो गई है। सीबीआई एवं पालिका से जुड़े अधिकारी इस बारे में मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं और पालिका के अधिकारी अपना पक्ष मजबूत बता रहे हैं, किंतु सूत्रों पर विास किया जाए तो इस मामले में पालिका अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा बरती गई ‘लापरवाही’
पालिका की छीछालेदर कर सकती है। यहां तक कि कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है। ज्ञातव्य हो कि नगर पालिका द्वारा बीते वर्ष 2010-11 के लिये आमंत्रित लेक ब्रिज के ठेके के पहले चरण में रुड़की के नवबहार अली ने सर्वाधिक Rs2.1 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। बाद में ठेका दूसरे चरण में Rs1.51 करोड़ की बोली लगाने वाले निविदादाता के नाम आवंटित हो गया। इस बारे में अली का कहना था कि उन्हें पालिका द्वारा भेजा गया पत्र समय से नहीं मिला, जिस कारण वह समय पर नहीं पहुंच पाया और जब तक पहुंचा तब तक पालिका उसकी 10 लाख रुपये की धरोहर राशि जब्त कर नये सिरे से प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। इस पर पालिका के अधिकारी सफाई दे रहे हैं कि अली को प्रपत्र मिल गये थे वह समय पर ही पालिका की बैठक में आया और उसने ठेका लेने से इसलिये मना कर दिया कि पूर्व में ठेका काफी कम धनराशि का होने के कारण उसे यह घाटे का सौदा लगा था। इसकी वीडियो क्लिप भी उनके पास हैं किं तु इससे इतर पालिका की कार्यपण्राली पर जो सवाल उठ रहे हैं वह हैं कि अली को पालिका ने पहले 26 मार्च की शाम कोरियर से पत्र भेजा, जिसकी प्राप्ति साबित करने के लिये पालिका अधिकारी कोरियर कंपनी का प्रमाण पत्र हासिल कर लाए, जबकि उन्हें पत्र पहले ही नियमानुसार ‘भारतीय डाक’ से भेजना चाहिए था।अली ने यदि मना किया भी था तो पालिका ने दूसरी सबसे बड़ी करीब दो करोड़ की बोली लगाने वाले बोलीदाता को चुंगी के ठेके की पेशकश नहीं की। यहां तक कहा जा रहा है कि पालिका के अधिकारियों ने अली की जो एफडी जब्त की, वह वास्तव में किसी और के नाम की थी। तीसरे, जब नये सिरे से निविदा आमंत्रित की गई तब उसमें न्यूनतम सीमा का कोई उल्लेख नहीं था, जबकि पहले चरण में Rs1.85 करोड़ न्यूनतम सीमा बताई गई थी। बहरहाल, दो दिन की जांच में सीबीआई के तीन सदस्यीय दल ने पालिका के ईओ नीरज जोशी व कर अधीक्षक राजदेव जायसी सहित संबंधित कर्मचारियों से प्रपत्रों के आधार पर पूछताछ की है। कुछ को आगे की जांच के लिये देहरादून भी तलब किया गया है। आगे संभावना जताई जा रही है कि कई जांच टीमें आएंगी, जो अधिकारियों व कर्मचारियों की व्यक्तिगत छानबीन भी कर सकती हैं। 

2 टिप्‍पणियां:

Manpreet Kaur ने कहा…

जानकारी भरा पोस्ट !मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है !
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डॉ. नवीन जोशी ने कहा…

Thank You Manpreet ji,
I visited your blog several times and Liked very much.