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शनिवार, 11 जून 2011

अब नयना देवी मंदिर भी होगा ऑनलाइन



मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट ने टाटा कम्युनिकेशन को दिया जिम्मा घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से हो सकेंगे दर्शन
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल की मां नयना देवी भी वैष्णो देवी, शिरडी के साई बाबा, बर्फानी बाबा अमरनाथ तथा बाबा केदार व बद्रीनाथ की तरह ऑनलाइन होने जा रहीं हैं। मंदिर प्रबंधन अमर-उदय ट्रस्ट ने टाटा कंसलटेंसी को यह जिम्मेदारी सौंप दी है, जिसके बाद टाटा इसके लिए जरूरी उपकरण मंदिर परिसर में ले आया है, और अब इंस्टालेशन करने की तैयारी कर रहा है। इस कवायद के बाद क्लोज सर्किट कैमरे की मदद से मंदिर की गतिविधियां रिकार्ड होंगी, तथा उन्हें इंटरनेट के माध्यम से ‘ऑनलाइन’ किया जाएगा। गतिविधियों को एक चैनल पर ‘लाइव’ प्रसारित किये जाने की भी कोशिश चल रही है। 
बदलते परिवेश और समय की कमी के दौर में श्रद्धालु चाहते हुए भी मंदिर नहीं आ पाते। मंदिर में भीड़- भाड़ के कारण ठीक से दर्शन न होने तथा मंदिर में पंडों-पुजारियों के रवैये, अन्य असुविधाओं तथा मंदिर की दूरी के कई तत्व श्रद्धालुओं को मंदिर आने से रोकते हैं। इस समस्या का निदान है मंदिरों का ‘ऑनलाइन’ दर्शन। देश में कई चुनिंदा मंदिरों से ऐसी शुरूआत हो चुकी है, जिसमें अब सरोवरनगरी का पवित्र नयना देवी मंदिर भी शामिल होने जा रहा है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष वीरेंद्र नाथ शाह के हवाले से कोषाध्यक्ष जेपी साह ने बताया कि इसके लिए टाटा कम्युनिकेशन जरूरी उपकरण मंदिर परिसर में ला चुका है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस कवायद से मंदिर को दुनिया भर में पहचान मिलेगी, और माता नयना पर आस्था रखने वाले दुनिया भर में मौजूद लोग मंदिर से जुड़े रहेंगे। उन्होंने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से मंदिर की ‘लाइव एक्टिविटी’देखी जा सकेगी।
उल्लेखनीय है की अभी हाल ही में नयना देवी मंदिर 'ग्रीन' भी हो चूका है। मंदिर पवन ऊर्जा से प्राप्त 25 वाट के 50 सी एफ एल  बल्बों से जगमगा रहा है।
शक्तिपीठ है यह मंदिर
नैनीताल। नयना मंदिर को शक्तिपीठ की मान्यता दी जाती है। देवी भागवत के अनुसार भगवान शिव जब माता सती के दग्ध अंगों को आकाश मार्ग से कैलाश की ओर ले जा रहे थे, तभी मां की एक आंख यहां तथा दूसरी हिमाचल प्रदेश के नैना देवी में गिरी थी। यहां मां की आंख के ही आकार के नैना सरोवर के किनारे प्राचीन मंदिर की उपस्थिति बताई जाती है। 18 सितंबर 1880 को आए भूस्खलन में वर्तमान बोट हाउस क्लब के पास स्थित वह प्राचीन मंदिर जमींदोज हो गया था। उस मंदिर का विग्रह एवं कुछ अंश वर्तमान स्थान पर मिले, जिसके बाद नगर के संस्थापकों में शुमार नेपाल निवासी मोती राम शाह के पुत्र अमर नाथ शाह ने अंग्रेजों से एक समझौते के तहत यहां सवा एकड़ भूमि पर 1883 में मंदिर स्थापित किया था। मंदिर में नेपाली काले पत्थर से निर्मित नयना देवी की मूर्ति स्थापित की गई, मंदिर नेपाली, तिब्बती, पैगोडा व कुछ हद तक अंग्रेजी गौथिक व ग्वालियर शैली में बना हुआ है।

चीन, कंबोडिया व दक्षिण भारतीय शैली में बन रहा दशावतार मंदिर
नैनीताल। नगर के नयना देवी मंदिर परिसर में विशाल दशावतार मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। यह मंदिर चीन व कंबोडिया की मंदिर शैली पर निर्मित किया जा रहा है, जबकि इसमें स्थापित होने वाली ईश्वर के दश अवतारों मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, नृसिंह, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध व कल्की (जिन्हें कलयुग में होने वाला अवतार कहा जाता है) की मूर्तियां लगेंगी। मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट के अनुसार मूर्तियां दक्षिण भारतीय कलाकारों द्वारा वहीं के पत्थरों से तराशकर बनाई जाएंगी। वर्तमान मंदिर की हवन शाला के छत में बन रहे इस मंदिर के भवन निर्माण हेतु फिलहाल ट्रस्ट ने 13 लाख रुपये का प्राविधान किया है, जिसके बढऩे की भी पूरी गुंजाइश रखी गई है। मंदिर का भवन चीन व कंबोडिया की शैली में बनना प्रस्तावित है। इसकी छत टिन की बनी होगी। मंदिर के निर्माण में चार-पांच वर्ष लगने की संभावना जताई जा रही है। 
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