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मंगलवार, 7 जून 2011

बिना शिक्षकों के टॉप कर रहे ‘गुदड़ी के लाल’


अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों के सैकड़ों पद रिक्त
नैनीताल (एसएनबी)। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में अशासकीय विद्यालयों के ‘गुदड़ी के लालों’ ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इन स्कूलों में शिक्षकों, प्रधानाचायरे के वर्षो से सैकड़ों पद रिक्त हैं। शिक्षा विभाग उन्हें दोयम दज्रे का मानता है, और उनके यहां सुविधाएं देने अथवा पदों पर भर्ती की किसी को सुध नहीं है। बात इंटरमीडिएट परीक्षा टॉप करने वाले कंचन कुमार कांडपाल के भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय से ही बात शुरू करें तो यहां शिक्षकों के 14 से अधिक पद रिक्त हैं। वहीं नैनीताल जनपद के चार अशासकीय हाईस्कूलों में एलटी शिक्षकों के 11, प्रधानाध्यापक के दो तथा 19 इंटर कालेजों में शिक्षकों के 100, प्रवक्ताओं के 50, प्रधानाचायरे के सात व शिक्षणोत्तर कर्मियों के 56 पद रिक्त हैं। यही कहानी प्रदेश में अव्वल रहने वाले कुमाऊं मंडल के अन्य जिलों की भी है। अल्मोड़ा जिले के चार हाईस्कूलों में आठ शिक्षकों, दो प्रधानाध्यापकों व पांच शिक्षणोत्तर कर्मियों तथा 30 इंटर कालेजों में 165 शिक्षक, 55 प्रवक्ता, 15 प्रधानाचार्य व 59 शिक्षणोत्तर कर्मी नहीं हैं। बागेर में जहां तीन हाईस्कूलों में छह शिक्षक व चार ही शिक्षणोत्तरकर्मी, 12 इंटर कालेजों में 64 शिक्षक, छह प्रधानाचार्य व 26 शिक्षणोत्तरकर्मी तथा पिथौरागढ़ में दो हाईस्कूलों में आठ एलटी शिक्षकों, दो हेडमास्टरों व चार शिक्षणोत्तर कर्मियों की कमी है।
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