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रविवार, 23 जनवरी 2011

नैनीताल में स्थापित होगी एडीबी यूनिट

77.53 करोड़ रुपये की पेयजल कायाकल्प महायोजना पर छाया कुहासा छंटने की उम्मीद
नैनीताल (एसएनबी)। मुख्यालय में वर्ष 2040 की आवश्यकता के मद्देनजर दीर्घकालीन महत्व की 77.53 करोड़ रुपये की पेयजल कायाकल्प महायोजना पर छाये बादलों के छंटने की उम्मीद की जा सकती है। 22 दिसंबर को राष्ट्रीय सहारा ने इस बाबत ‘77.53 करोड़ की पेयजल कायाकल्प महायोजना गुम !’ शीषर्क से प्रमुखता से प्रकाशित हुई खबर पर संज्ञान लेते हुए नगर में जल निगम के अभियंताओं को शामिल करते हुए एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की एक यूनिट की स्थापना के निर्देश दिए हैं। यूनिट के लिए अभियंताओं के नाम भी तय कर दिए गए हैं। 
मालूम हो कि वर्ष 2002 में जिला व मंडल मुख्यालय में बढ़ते पर्यटन के मद्देनजर वर्ष 2040 की जरूरत के अनुसार नगर की पेयजल व्यवस्था के कायाकल्प के लिए एडीबी ने 77.53 करोड़ रुपये की महायोजना बनाई थी। आठ वर्ष बीतने के बाद योजना धरातल पर आगे नहीं बढ़ी। कारण, नगर में योजना के न कारिंदे हैं न अधिकारी। इधर शासन ने जल निगम के एक अधिशासी अभियंता एवं तीन सहायक अभियंताओं को नई एडीबी यूनिट में नामांकित करते हुए नई यूनिट को स्वीकृति दे दी है। विस्त सूत्रों के अनुसार नई यूनिट में पेयजल निगम के एनएस बिष्ट अधिशासी अभियंता एवं पीसी जोशी, बीएस दोषाद व यांत्रिक शाखा के प्रणय राय सहायक अभियंता होंगे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2002 में नगर की पेयजल महायोजना का खाका खींचा गया था। माना गया था कि 2040 में नगर की संभावित 2.01 लाख आबादी के लिए 30.94 एमएलडी (मीट्रिक लीटर प्रति दिन) पानी की जरूरत होगी। वर्ष 2004 में एशियाई विकास बैंक यानी एडीबी ने इसके लिए 77.53 करोड़ की महायोजना तैयार की थी। इस योजना के तहत पहला चरण 2008 से 2012 तक तथा दूसरा वर्ष 2009 से 2013 तक संपन्न होना था। पहले चरण में 13.19 करोड़ रुपये की लागत से पुराने सभी पांच पंपिंग प्लांट की जगह नए प्लांट एवं दो-दो एमएलडी के चार नलकूप स्थापित होने थे। इसके साथ ही 4.09 करोड़ से ऑल सेंट क्षेत्र में पंप हाउस, राइजिंग मेन, जलाशय तथा वितरण लाइनों, 16.85 करोड़ से नगर के विभिन्न क्षेत्रों में 17 राइजिंग मेन यानी पंपों से जलाशयों को जाने वाली लाइनों तथा 5.41 करोड़ रुपये से विभिन्न क्षेत्रों में 11 जलाशयों का निर्माण किया जाना था। 2009 से वितरण लाइनों को जोड़ने व बिछाने, ‘स्काडा’ के तहत जल वितरण पण्राली का ‘ऑटोमेशन’, जल वितरण की मीटरिंग पण्राली एवं जल संसोधन का ‘साफ्टनिंग प्लांट’ स्थापित किया जाना था।
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