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शनिवार, 20 दिसंबर 2014

प्रधान पतियों के ठेंगे पर सरकारी फरमान


महिला जनप्रतिनिधियों ने कहा लगातार हों पंचायतों, बीडीसी की बैठकें, मिले मानदेय
नैनीताल (एसएनबी)। महिला जनप्रतिनिधियों ने बताया कि अब सरकारी फरमान के बाद पंचायतों एवं बीडीसी बैठकों में प्रधानपतियों का बैठकों में तो प्रवेश रुक गया है, लेकिन अब भी वह अधिकारियों के साथ बैठकों के बाहर से साठगांठ जारी रखे हुए हैं। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि विभागों में अधिकांश अधिकारी पुरु ष हैं, जो विकास कायरे में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी के बारे में महिला जनप्रतिनिधियों से बातें नहीं कर पाते, लेकिन उनके पतियों के माध्यम से अपनी कारगुजारियां जारी रखे हुए हैं। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत जताई है तथा बीडीसी एवं ग्राम पंचायत आदि की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित किए जाने को जरूरी बताया है, ताकि वह भी कुछ सीख सकें तथा विकास कायरे को गति दे सकें। इसके अलावा उन्होंने सम्मानजनक मानदेय दिये जाने की भी जरूरत जताई है।तल्लीताल धर्मशाला में सरल संस्था के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में ग्राम प्रधान, उप प्रधान एवं गांवों की वार्ड सदस्य आदि महिला जनप्रतिनिधि पत्रकारों से अपनी समस्याओं पर बात की।उनका कहना था कि अनेक ग्राम प्रधान अधिक सक्रिय नहीं हैं, जबकि अन्य उप प्रधानों एवं वार्ड सदस्यों को टीम के रूप में साथ लेकर नहीं चलते, तथा उन्हें योजनाओं व बजट आदि की जानकारी नहीं देते हैं। निर्वाचित होने के छह माह हो गए हैं, लेकिन अब तक एक भी बैठक नहीं हुई है। ऐसे में एक ओर उन पर उन्हें चुनने वाली जनता का विकास कायरे को लेकर दबाव होता है, वहीं वह कहीं अपनी बात नहीं रख पाते। कार्यशाला में सरल संस्था की प्रमुख हेमा कबडवाल, भगवती सुयाल, नीतू राजपूत, शोभा देवी, ममता कुल्याल, नीमा देवी, रजनी देवी, राजकुमारी, जयंती ढैला, रत्ना पंत, जया रावत, चंपा मेलकानी, सरिता कार्की, गंगा टम्टा, हेमा नेगी आदि मौजूद रहीं। 
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