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बुधवार, 18 जुलाई 2012

यहां ‘आने-जाने’ की बातें ही क्यों करते रहे काका



  • कटी पतंग और जाना फिल्मों की शूटिंग को आये थे राजेश खन्ना नैनीताल
  • रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार... व जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा, उस गली से हमें तो गुजरना नहीं गीतों में की थी अदाकारी
नवीन जोशी, नैनीताल। रुपहले हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना यानी 'काका'  का नैनीताल से गहरा संबंध रहा था। वह दो बार फिल्मों की शूटिंग के लिये आये तो कई बार उन्होंने यहां की निजी यात्राऐं भी की थीं। लेकिन यह संयोग ही रहा कि आज दुनिया से रुखसत कर चुके काका जब भी नैनीताल आये ‘आने-जाने’ की ही बातें करते रहे। यहाँ फिल्माए गये उनके अधिकाँश गीतों और फिल्म 'जाना' के नाम में ‘आने-जाने’ जैसे उदासी भरे शब्द थे, जबकि जीवन के साथ ही अपनी कालजयी फिल्म 'आनंद' के जरिये वह जीवन की कठोर विभीषिकाओं को भी सामान्य तरीके से जीने का सन्देश देते रहे।
यह संयोग ही रहा कि कला की नगरी कहे जाने वाले नैनीताल में राजेश खन्ना अपने करियर के चढ़ाव और उतार दोनों दौर में आये। उनका यहाँ पहला आगमन 1960 के दशक के आखिरी वर्षों में हुआ था। यह वह समय था, जब तक वह स्टारडम हासिल कर चुके थे। शक्ति शामंत उस जमाने के नामचीन निर्देशक थे, जिन्होंने उस दौर की हसीन अभिनेत्री आशा पारेख को पहली बार एक विधवा के रूप में कटी पतंग फिल्म के जरिये उतारने का खतरा मोल लिया था। हीरोइन विधवा के रूप में कमोबेश पूरी फिल्म में सफेद साड़ी पहने थी, तो पूरी फिल्म को आकर्षक बनाने की जिम्मेदारी राजेश खन्ना पर ही थी। उन्होंने इस जिम्मेदारी को बखूबी संभाला भी। फिल्म की अधिकांश शूटिंग मुम्बई के नटराज स्टूडियो के अलावा नैनीताल व रानीखेत में हुई थी। नैनीताल की नैनी झील में राजेश और आशा के बीच बरसात के मौसम में ही ‘जिस गली में तेरा घर ना हो बालमा, उस गली से हमें तो गुजरना नहीं’ गीत फिल्माया गया था। यह गीत आज भी उस दौर के नैनीताल की खूबसूरती का आईना है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान काका के स्टारडम का आलम यह था कि निर्देशक के लिए नैनी झील में शूटिंग करना  नहीं रहा ऐसे मैं शक्ति सामंत को नैनीताल की सभी नावें शूटिंग के दौरान के लिए किराए पर लेनी पडी इसी तरह दूसरा चर्चित गीत ‘रहने दो छोड़ो भी जाने दो यार, हम ना करेंगे प्यार’ नगर के बोट हाउस क्लब के बार में फिल्माया गया था।  नगर के वरिष्ठ पत्रकार एवं कलाकार उमेश तिवाड़ी ‘विश्वास’ बताते हैं कि इस गीत में बोट हाउस क्लब के बार की खूबसूरती उभर कर आई थी। उस दौर में यह गीत बार, डिस्को आदि में खूब बजता था। यहाँ इस फिल्म का 'ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाय। मुझे डोर कोई खींचे, तेरी और किये जाए' गीत भी फिल्माया गया। इस फिल्म में अदाकारी के लिये काका को सर्वश्रेष्ठ अदाकार के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था, जबकि आशा पारेख को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। उस दौर में श्री विश्वास के दादाजी पं. धनी राम तिवाड़ी का निकटवर्ती गरमपानी में रेस्टोरेंट था। यहां रानीखेत जाते हुऐ काका रुके थे, और ‘दार्जिलिंग चाय’ की चुश्कियों का आनंद लिया था। हालिया दौर में अपनी दूसरी फिल्मी पारी के दौरान काका वर्ष 2005 में शाहरुख मिर्जा की फिल्म 'जाना-लेट्स फाल इन लव ' की शूटिंग के लिये नैनीताल आये थे। यह उनके करियर का बुरा दौर था। इस फिल्म में 35 वर्षों के बाद काका ने अपने दौर की मशहूर अभिनेत्री जीनत अमान के साथ बीते दौर के कई गीतों की पैरोडी पर भी अभिनय किया था] यह फिल्म  के झगड़े के कारण रिलीज भी नहीं हो पायी थी। इस फिल्म की यूनिट नगर के फेयर ट्रेल्स होटल में ठहरी थी, जबकि बैंड स्टेंड, बोट हाउस क्लब, माल रोड आदि स्थानों पर इसकी शूटिंग हुई थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान इस संवाददाता से भी काका ने बात की थी, तथा नैनीताल की खूबसूरती की दिल खोल कर सराहना की थी। आज काका इस दुनिया से जा चुके हैं, तो नगर के कला प्रेमियों के मन में यह सवाल बार-बार उठ रहा है, काका आप यहां हमेशा ‘आने-जाने’ की बातें ही क्यों करते रहे ?
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