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शुक्रवार, 27 अप्रैल 2012

पहाड़ के लिए होगी अलग पुलिसिंग

डीजीपी ने कहा, भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होगी पुलिस व्यवस्था
पहाड़ के लिए अलग मानक बनेंगे, सामुदायिक सहभागिता, रात्रि गश्त और पिकेटिंग को बढ़ाया जायेगा
नैनीताल (एसएनबी)। उत्तराखंड पुलिस पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप अलग पुलिस व्यवस्था लागू करेगी। पुलिस महानिदेशक विजय राघव पंत ने बताया कि पहाड़ के लिए मैदानी क्षेत्रों से अलग पुलिस व्यवस्था के मानक भी तय किये जाएंगे। पहाड़ पर पुलिस सामुदायिक सहभागिता पर बल देगी। पहाड़ी शहरों में रात को पैदल गश्त की जायेगी। शहरों के प्रवेश द्वारों पर पिकेट लगाकर वाहनों की जांच होगी। डीजीपी ने इस व्यवस्था को लागू करने से पूर्व पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित करने की बात भी कही, ताकि पिकेट या रात्रि गश्त आमजन की परेशानी या वाहनों से वसूली का अड्डा न बन जाएं। उन्होंने पहाड़ पर घुड़सवार पुलिस की तैनाती तथा मोटरसाइकिलों की बजाय पैदल या साइकिलों से गश्त कराने की बात कही। शुक्रवार को मुख्यालय में डीजीपी पंत ने पत्रकारों से कहा कि पहाड़ में मैदानी क्षेत्रों के मानकों पर पुलिस व्यवस्था चल रही है। यहां भौगोलिक परिस्थितियों के साथ अपराधों की संख्या और प्रकार में अंतर है। पहाड़ में हत्या और डकैती जैसे बड़े अपराधों की बजाय छोटी-छोटी चोरियां जैसे अपराध अधिक होते हैं। इनसे समाज में भय का माहौल बनता है। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पहाड़ के लिए अलग पुलिसिंग के मानक बनाये जा रहे हैं। उन्होंने पुलिसकर्मियों को वाहनों की बजाय पैदल चलने पर जोर देते हुए कहा कि वे जनता से मिलें-जुलें, ताकि जनता उन्हें सहजता से शिकायतें बता सकें। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास अपराध संबंधी अधिक कार्य नहीं होते इसलिए वह निराश्रित रोगियों को अस्पताल पहुंचाने जैसे सामुदायिक सहभागिता के कार्य कर सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के दो दर्जन से अधिक घुड़सवार पुलिस के जवान प्रशिक्षित किये जा चुके हैं। इनकी एक टुकड़ी हल्द्वानी में स्थापित होगी। इनका जरूरत पड़ने पर पहाड़ में उपयोग किया जा सकेगा। उन्होंने प्रदेश के चार जिलों में महिला पुलिस कप्तानों की तैनाती को प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने तथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में कदम बताया। उन्होंने सीमावर्ती पुलिस थानों और चौकियों के सुदृढ़ीकरण तथा यहां कार्यरत पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने की बात भी कही।
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