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बुधवार, 14 मार्च 2012

‘विरासत पथों’ पर लीजिये घुमक्कड़ी का लुत्फ

 जनपद में चार विरासत पैदल पथ विकसित करने की योजना 

यह होंगे चार विरासत पथ : 1. पीटर बैरन पथ 2. टैगोर पथ 3. राजभवन पथ 4. वन विहार पथ
नवीन जोशी, नैनीताल। ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहां, जिंदगी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहां।’ ‘घुमक्कड़ी’ के लिए प्रसिद्ध साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन की यह पंक्तियां यदि आपको भी उद्वेलित करती हैं तो प्रकृति का स्वर्ग कही जाने वाली सरोवरनगरी चले आइये। यदि आप यहां पहले भी आ चुके हैं तो भी आपका यहां अगला आगमन आपको प्रकृति के और करीब ले जा सकता है। दरअसल उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के तत्वावधान में जनपद मुख्यालय के साथ ही नजदीकी स्थलों की नैसर्गिक सुंदरता को पूरी तरह महसूस करने के लिए चार ‘विरासत पथों’ की पहचान कर ली गई है और अब इन्हें जल्द विकसित करने की तैयारी है। अमूमन लोग सरोवरनगरी के नगर क्षेत्र को घूमकर ही मान बैठते हैं कि उन्होंने यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को देख लिया, लेकिन ऐसा नहीं है। इस नगर की प्रकृति के स्वर्ग के रूप में वैिक छवि है तो इसलिए कि नगर के निकटवर्ती क्षेत्रों में भी पर्यटन के लिहाज से ‘विरासत’ छिपी हुई है। पूर्व डीएम डा. राकेश कुमार ने इन विरासतों को संरक्षित करने के साथ ही इन्हें सैलानियों को दिखाने का एक रूट मैप तैयार किया था। इधर, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने भी कुछ इसी तर्ज पर चार ‘विरासत पथों’ को चिह्नित कर लिया है जिन्हें अब विकसित किया जाना है। इनमें पहला विरासत पथ नगर के अंग्रेज खोजकर्ता पीटर बैरन ट्रैक के नाम से जाना जाएगा। यह ट्रैक वही होगा, जिस रास्ते से बैरन के 18 नवम्बर 1839 में पहली बार नैनीताल आने की बात कही जाती है। यह पैदल रूट अल्मोड़ा राजमार्ग पर स्थित रातीघाट नाम के स्थान से नगर के बिड़ला चुंगी नाम के स्थान तक आता है। दूसरा विरासत पथ गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर को समर्पित होगा। इस पथ के जरिये सैलानियों को फलों की घाटी कहे जाने वाले रामगढ़ से टैगोर टॉप से महेश खान होते हुए भवाली के श्यामखेत तक लाया जाएगा। तीसरा पथ राजभवन ट्रैक कहलाएगा, यह पथ मुख्यालय में लैंड्स एंड के करीब सेमीधार से शुरू होकर गौथिक शैली में बने इंग्लैंड के बर्मिघम पैलेस की प्रतिकृति कहे जाने वाले नैनीताल राजभवन तक पहुंचेगा। जबकि चौथे पथ को वन विहार पथ का नाम दिया गया है। यह पथ नगर के निकट नैना पीक स्थित सत्यनारायण मंदिर से नैना पीक होते हुए किलबरी तक जाएगा। जिला साहसिक खेल अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि प्रकृति को अधिक करीब से जानने के लिए परिषद की पहल पर इन विरासत पथों को विकसित करने के प्रस्ताव तैयार कर भेज दिए गए हैं।

मुख्यालय में बनेगी एक और कृत्रिम दीवार
नैनीताल। मुख्यालय में बारापत्थर क्षेत्र की तरह एक और कृत्रिम दीवार तैयार करने की योजना है। जिला साहसिक खेल अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि झीविप्रा के धन से बारापत्थर में बनी दीवार निजी संस्था को सौंप दी जिसका लाभ आमजन को नहीं मिल पा रहा है। इसके उपयोग के लिए सरकारी विभागों को भी 500 रुपये रोजाना प्रति व्यक्ति देने पड़ते हैं। इसलिए पर्यटन विकास परिषद की पहल पर यहां एक और दीवार बनाने के लिए स्थान की तलाश की जा रही है। नगर पालिका से इसके लिए फ्लैट मैदान में स्थान मांगा गया है। कृत्रिम दीवारों पर चढ़ाई करना ओलंपिक स्तर की साहसिक खेल स्पर्धा है, लेकिन नगर में पहले से मौजूद दीवार से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है। देहरादून व मसूरी में भी ऐसी कृत्रिम दीवार बनाने की योजना है।

बजून ट्रैक पर सर्च करने अभियान दल रवाना
नैनीताल (एसएनबी)। जनपद में पंगूट, तुषारपानी, बजून अल्प ज्ञात ट्रैकिंग रूट को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से 10 सदस्यीय दल सर्च ट्रैक अभियान पर रवाना हो गया। इस पांच दिवसीय अभियान को पूर्व संयुक्त निदेशक पर्यटन गणोश प्रसाद ढौंडियाल ने मल्लीताल पंत पार्क के पास से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बुधवार को दल के सदस्यों को रवाना करते हुए श्री ढौंडियाल ने मार्ग में खानपान में एहतियात बरतने, टीम भावना से चलने जैसे उपयोगी सुझाव दिये। जिला साहसिक खेल अधिकारी लता बिष्ट ने बताया कि अल्प ज्ञात पर्यटक स्थलों को विकसित करने के उद्देश्य से रवाना हुआ दल पंगूट, तुषारपानी, दौलियाखान, टीट देवी मंदिर, अधोड़ा गांव, बजून व नारायणनगर होते हुए आगामी 18 मार्च को 65 किमी की पैदल यात्रा कर मुख्यालय वापस पहुंचेगा। प्रशिक्षक नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में गये अभियान दल में डीएसबी परिसर के पवन कुमार, पंकज, सुशील कुमार, मुकेश कुमार व राहुल भट्ट, चोरगलिया के पूरन पालीवाल, हल्द्वानी के संतोषनाथ व कमल सिंह, ताकुला के मोहित जोशी व जगदीश जोशी शामिल हैं।
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