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मंगलवार, 17 जनवरी 2012

कालाढूंगी के चक्रव्यूह में फंस गये भाजपा के "बंशीधर"



चुनाव समीक्षा : कालाढूंगी विस क्षेत्र
भगत के लिए आसान नहीं जीत की राह, घिरे हैं चतुष्कोणीय मुकाबले में

प्रदेश की सर्वाधिक मुश्किल सीटों में है कालाढूंगी, 11 में से छह प्रत्याशी हैं मुकाबले में, 
नवीन जोशीनैनीताल। कालाढूंगी विस सीट को यदि प्रदेश की सर्वाधिक फंसी हुई सीट कहें तो अतिशयोक्ति न होगी। यहां विस चुनाव का बिगुल बजने से कहीं पूर्व दावेदारों का ‘संघषर्’ शुरू हो गया था। खासकर भाजपा- कांग्रेस के दावेदार इस सीट को ‘हॉट केक’ मानकर गटक जाने के ऐसे अतिविास में देखे गये कि मानो उन्हें टिकट मिला और उनका विधायक बनना निश्चित हो। टिकट पाने को सर्वाधिक सिर-फुटव्वल इस सीट पर देखी गई। अब जबकि पार्टियों के प्रत्याशी नामांकन करा चुके हैं, तब यह संघर्ष दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। 11 में से छह प्रत्याशी मुकाबले में हैं लेकिन आखिर में भाजपा, कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय महेश शर्मा के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला सिमट सकता है। ऐसे में इस सीट के प्रमुख भाजपा प्रत्याशी काबीना मंत्री बंशीधर भगत के बारे में कहा जा सकता है शेर अपनी मांद में घिर गया है। कालाढूंगी विस सीट के लिए पहली बार चुनाव हो रहा है। हल्द्वानी तथा पर्यटन नगरी नैनीताल-रामनगर के बीच होने के बावजूद विकास यहां कोसों दूर रहा है। उत्तराखंड बनने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुआ। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कालाढूंगी को प्रदेश का पहला हाईटेक पालिटेक्निक बनाने तथा वर्तमान सरकार ने रोडवेज बस अड्डा, मिनी स्टेडियम व गैस गोदाम बनाने जैसे ख्वाब दिखाए थे लेकिन पूरे नहीं किए। राज्य बनने और उससे पूर्व से यह सीट नैनीताल सीट का हिस्सा रही है। बीते 21 वर्षो से नैनीताल में शामिल इस सीट पर कांग्रेस नहीं जीत पाई है। 1986 में चुनाव जीते किशन सिंह तड़ागी इस सीट से आखिरी कांग्रेसी विधायक रहे। 91 की रामलहर से लगातार तीन चुनाव भाजपा के वर्तमान काबीना मंत्री बंशीधर भगत यहां से जीते। 2002 में डा. नारायण सिंह जंतवाल उक्रांद के टिकट पर भाजपा से यह सीट झटकने में सफल रहे लेकिन गत 2007 के विस चुनाव में भाजपा के खड़क सिंह बोहरा ने पुन: यह सीट हासिल कर भाजपा का एक बार पुन: नैनीताल से परचम फहराया। अब भगत क्षेत्र से चौथी और जंतवाल दूसरी जीत की कोशिश में फिर मैदान में हैं। इस क्षेत्र की खासियत रही है कि यहां की जनता जीतने वाले प्रत्याशी को वोट देती आई है। यानी जो भी विधायक जीतता है, इस क्षेत्र में उसे बढ़त मिली होती हैं। इसी कारण नैनीताल के वर्तमान विधायक खड़क सिंह बोहरा और पूर्व विधायक डा. नारायण सिंह जंतवाल ने यहां से दावेदारी की थी। नई सीट होने, नैनीताल सीट के सुरक्षित घोषित हो जाने तथा हल्द्वानी सीट के शहर क्षेत्र में ही सीमित हो जाने के कारण भाजपा- कांग्रेस सहित उक्रांद में यहां एक से अधिक दावेदार टिकट हासिल करने को ऐड़ी चोटी का जोर लगा रहे थे। भाजपा से काबीना मंत्री बंशीधर भगत और कांग्रेस से राहुल गांधी के करीबी बताये जा रहे प्रकाश जोशी के मैदान में आने से यह सीट प्रदेश की वीआईपी सीटों में शुमार हो गई है। भगत क्षेत्र में अपने संपकरे, पार्टी के कैडर मतदाताओं तथा पिछले विस चुनाव के अलावा लोस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को मिली बढ़त तथा स्वयं की लगातार तीन जीतों के आधार पर यहां जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के अन्य दावेदारों क्षेत्रीय विधायक बोहरा व भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गजराज बिष्ट की नाराजगी उनकी राह में बाधा बनी हुई है। दोनों दावेदारों ने क्षेत्र से चुनाव प्रचार करने से तौबा कर रखी है, ऐसे में वह भगत को नुकसान कितना पहुंचाएंगे, यह भगत की जीत-हार पर निर्भर करेगा। कांग्रेस से ‘पैराशूट प्रत्याशी’ बताये जा रहे प्रकाश जोशी की ऊर्जा स्वयं को स्थानीय साबित करने में लगी हुई है जबकि समर्थक उन्हें राहुल गांधी का नजदीकी होने का दावा कर क्षेत्र में विकास की गंगा बहा देने का ख्वाब दिखाकर जनता को अपने पक्ष में करने के प्रति आस्त हैं। कांग्रेस के बागी निर्दलीय उम्मीदवार जिला पंचायत अध्यक्ष कमलेश शर्मा के पति महेश शर्मा भगत के ही गृह क्षेत्र सर्वाधिक 65000 की जनसंख्या वाले ‘भाखड़ा वार’ में अच्छा दखल रखते हैं। उन्होंने क्षेत्र में बीते एक-दो वर्षो से अच्छी मेहनत की है, ऐसे में वह कांग्रेस प्रत्याशी के साथ ही भगत को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी भाखड़ा वार क्षेत्र निवासी जिपं सदस्य भूपेंद्र सिंह उर्फ भाई जी भी निर्दलीय उम्मीदवार हैं। उनकी भी खासकर युवा वर्ग में काफी पैठ बताई जा रही है। इस क्षेत्र में रक्षा मोर्चा के सुरेंद्र निगल्टिया, निर्दलीय कांग्रेस से जुड़े वीर सिंह भी मैदान में हैं। दूसरी ओर 45000 की आबादी वाले ‘भाखड़ा पार’ क्षेत्र जिसमें कालाढूंगी नगर भी शामिल है, बाहरी-भीतरी का मुद्दा अधिक दिखाई दे रहा है। यहां बसपा प्रत्याशी दीवान सिंह बिष्ट सबसे पहले पार्टी प्रत्याशी घोषित होने, अनुसूचित वर्ग के करीब 20 हजार तथा क्षत्रिय समुदाय के सर्वाधिक 51 हजार से अधिक वोट होने व स्वयं अकेले दमदार क्षत्रिय प्रत्याशी होने के आधार के साथ मजबूत दिखते हैं। क्षेत्र में साढ़े तीन हजार मुस्लिम, छह हजार पंजाबी, साढ़े चार हजार वैश्य के अलावा 15 हजार ब्राह्मण भी प्रभावी भूमिका में हैं। कांग्रेस, भाजपा, उक्रांद प्रत्याशी और निर्दलीय महेश शर्मा आदि के भी ब्राrाण होने के कारण वह किसी एक के पक्ष में मतदान करेंगे कहा नहीं जा सकता। निर्दलीय जनार्दन पंत, तृणमूल कांग्रेस के फिदाउर्हमान, सपा के उमेश शर्मा भी मैदान में हैं।
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