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रविवार, 15 मई 2011

नैनीताल जू में 'घर बसाएगा' नरभक्षी बंगाल टाइगर


गत वर्ष कार्बेट के बिजरानी जोन से पकड़ा गया था नरभक्षी नर व सांवल्दे से लाई गई थी बीमार मादा

इस तरह 'बाघ बचाओ मुहिम' भी  चढ़ेगी परवान
नवीन जोशी, नैनीताल। नैनीताल का पंडित गोविंद वल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणि उद्यान यानी नैनीताल चिडिय़ाघर देश भर में चल रही 'बाघ बचाओ' मुहिम का हिस्सा बनने जा रहा है। चिडिय़ाघर प्रबंधन यहां एक 'बंगाल टाइगर' नस्ल के नरभक्षी बाघ का 'घर' बसाने जा रहा है। कोशिश है कि उसे यहां एक मादा हम नस्ल मादा बाघ के साथ प्रेमालाप का मौका देकर 'वाइल्ड ब्रीडिंग' के लिये प्रेरित किया जाए।
गौरतलब है कि गत वर्ष चार अप्रैल को जनपद स्थित देश के जाने—माने कार्बेट नेशनल पार्क के बिजरानी जोन में एक नर बंगाल टाइगर आतंक का पर्याय बन गया था। उसने चार फरवरी 09 को सर्पदुली रेंज के ढिकुली गांव में भगवती देवी को हमला बोलकर मार दिया था, जिसके बाद बमुश्किल उसे एक पखवाड़े बाद घायल अवस्था में पकड़कर नैनीताल चिडिय़ाघर लाया गया था। उसका सौभाग्य ही कहिए कि चिडिय़ाघर कर्मियों की सुश्रुसा व देखभाल से न केवल वह स्वस्थ हो गया वरन इसी दौरान कार्बेट पार्क के सांवल्दे क्षेत्र से एक मादा बंगाल टाइगर वन विभाग के अधिकारियों को घायल अवस्था में मिल गई। एक ही नस्ल के इस युगल को देखकर नैनीताल चिडिय़ाघर प्रबंधन के मन में उनका घर बसाने का विचार आ गया, जिसे अब जल्द मूर्त रूप दिये जाने की कोशिश की जा रही है। चिडिय़ाघर के निदेशक बीजूलाल टीआर ने बताया कि एक पखवाड़े के भीतर दोनों को साथ में आम जनता हेतु प्रदर्शित किया जाएगा। साथ में यह कोशिश भी होगी कि वह जंगल की परिस्थितियों में ही 'वाइल्ड ब्रीडिंग' के लिये प्रेरित हों। साथ रहते हुए सहवास करें, व नैनीताल चिडिय़ाघर उनके  प्रजनन से शावक उत्पन्न कर 'बाघ बचाओ' मुहिम का हिस्सा बन गौरवांवित हो सके।

'उम्मीद' से है तिब्बती मादा भेडिय़ा !
नैनीताल। नैनीताल चिडिय़ाघर में पहली बार तिब्बती भेडिय़ों के बाड़ों में नन्ही किलकारी गूंजने की उम्मीद की जा रही है। चिडिय़ाघर के अधिकारियों के अनुसार इन दिनों एक मादा भेडिय़ा गुफा में घुस गई है, व शारीरिक रूप से लगता है कि गर्भवती है। चिडिय़ाघर के निदेशक बीजू लाल टीआर ने उम्मीद जताई कि पहली बार यहां तिब्बती भेडिया का स्वस्थ शिशु पैदा हो सकता है। ऐसा हुआ तो यह चिडिय़ाघर के लिये बड़ी उपलब्धि होगी, क्योंकि यहां रखे भेडिय़े अधिक ऊंचाई के तिब्बती क्षेत्रों के हैं।
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