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मंगलवार, 1 फ़रवरी 2011

टल गई अन्न की ’अटल‘ योजना


सस्ता राशन योजना: विक्रेता न बिगाड़ दें कहीं खेल
विक्रेताओं को है लाभ की बजाय हानि का अंदेशा
(कहा जा रहा है कि अब यह योजना 11 फरवरी को भाजपा संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय की पुन्य तिथि से लागू होगी)
नैनीताल। भाजपा सरकार ने ‘मिशन 2012’ के मद्देनजर तैयार की सस्ता राशन योजना पर पहला ब्रेक स्वयं ही लगा दिया है। अब यह योजना एक की बजाय 11 फरवरी से शुरू किए जाने की कवायद की जा रही है। मगर लगता नहीं है कि यह योजना परवान चढ़ पाएगी। कारण एक नहीं कई हैं। मसलन कांग्रेस ने राजनीतिक तरकश से सरकार की मंशा पर पानी फेरने के लिए तीर निकाल लिया है। हरिद्वार में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने का हवाला देते हुए कांग्रेसी दिग्गज चुनाव आयोग की ओर आस भरी नजरों से देख रहे हैं। इतना ही नहीं सरकारी राशन विक्रेताओं में भी इस योजना को लेकर कोई उत्साह नजर नहीं आ रहा है। 
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार विपक्ष खासकर कांग्रेस पार्टी को भाजपा सरकार की सस्ता राशन योजना अपने ‘मिशन 2012’ की राह में सबसे बड़ा रोड़ा नजर आ रही है। इसीलिए हरिद्वार पंचायत चुनाव का शिगूफा छेड़ा गया। इससे इतर सस्ता गल्ला विक्रेता, जिन पर योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी है योजना से बेहद नाराज हैं। वह अपना विरोध जता भी चुके हैं। कारण यह है कि अब तक उन्हें राशन को गोदाम से लाने के खचरे, छीजन (सामान्य तौर पर राशन के बोरों में मिलने वाली कम मात्रा) आदि के खचरे की प्रतिपूर्ति डीएम द्वारा निर्धारित दरों से हो जाती थी। उदाहरणार्थ बीपीएल उपभोक्ताओं को नैनीताल जनपद में गेहूं की दर 4.65 तथा दूरस्थ क्षेत्रों में पांच रुपये तक में मिलते थे। बावजूद इसके राशन विक्रेता खुश नहीं थे। नई आ रही सस्ता राशन योजना में विक्रेता को चार रुपये की दर से ही गोदाम से खाद्यान्न उठाना है, और इसी दर पर देहरादून से लेकर दूरस्थ मुन्स्यारी में भी बेचना है जबकि विक्रेताओं के लिए गोदाम से खाद्यान्न की ढुलाई का खर्च अलग- अलग होगा। यानी विक्रेता को नई योजना से लाभांश, कमीशन, भाड़ा व छीजन आदि स्वयं ही वहन करना पड़ेगा। ऐसे में विक्रेताओं का नाराज होना भी लाजिमी है। उल्लेखनीय है कि गांवों में सस्ता गल्ला विक्रेताओं का अच्छा सम्मान होता है, ऐसे में संभावना बनती है कि वह आम जनमानस में सरकार की छवि को धूमिल कर सकते हैं। 
कुल 26,073 उपभोक्ता निराश 
सरकार की सस्ता राशन योजना से जिले के 26,073 बीपीएल एवं 11,372 अंत्योदय उपभोक्ताओं को लाभ मिलना था। बीपीएल को अब तक 4.65 रुपये की दर से गेहूं और 6.26 रुपये की दर से चावल जबकि अंत्योदय श्रेणी उपभोक्ताओं को दो व तीन रुपये की दर से ही गेहूं-चावल मिलता था। आगे बीपीएल और अंत्योदय दोनों श्रेणी के उपभोक्ताओं को आज से दो व तीन रुपये प्रति किग्रा की दर से गेहूं-चावल मिलना था। यानी योजना के बाद बीपीएल व अंत्योदय एक हो जाने थे लेकिन योजना फिलहाल 11 दिन खिसकने से उपभोक्ता मायूस हैं। बहरहाल, जिला आपूर्ति अधिकारी राहुल शर्मा ने बताया कि दुकानों पर राशन उपलब्ध करा दिया गया है। एपीएल को कोई उम्मीद नहीं एपीएल उपभोक्ताओं को सरकार की सस्ता गल्ला योजना से कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। 
एपीएल को कोई आश नहीं 
सरकार की घोषणा के अनुसार नैनीताल जनपद में एपीएल श्रेणी के करीब दो लाख उपभोक्ताओं को चार रुपये प्रति किग्रा की दर से पूर्व की तरह 20 किग्रागेहूं (पूर्व दर 6.60) एवं छह रुपये की दर से 15 किग्राचावल (पूर्व दर 8.65) मिलना था लेकिन हालात यह हैं कि जिले को एपीएल के लिए हर माह 3,983.78 मीट्रिक टन गेहूं की जरूरत के सापेक्ष केवल 2,279.50 एमटी एवं 2,967.83 एमटी चावल के सापेक्ष केवल 440 एमटी चावल ही मिल पा रहा है। ऐसे में केवल पहाड़ी क्षेत्रों में बेहद सीमित लोगों को ही अनाज मिल पा रहा है। 
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